​पीलीभीत। लखनऊ के संयुक्त कृषि निदेशक अखिलेश कुमार सिंह ने शुक्रवार को मरौरी ब्लॉक के महुआ गांव का दौरा कर वैज्ञानिक विधि से बोई गई डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) धान की फसल का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय प्रगतिशील किसान नवजोत भुल्लर के प्लांट को देखा और आधुनिक तकनीक को अपनाने के लिए उनकी सराहना की।
​निरीक्षण के दौरान मौजूद अधिकारियों व किसानों को जानकारी दी गई कि डीएसआर धान की खेती की एक बेहद उन्नत और आधुनिक विधि है। इस तकनीक में पारंपरिक तरीके से नर्सरी उगाने या पौधों की रोपाई करने के बजाय बीजों की सीधे खेत में बुवाई की जाती है, जिसके लिए मई से जून के बीच का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह विधि न केवल पानी की भारी बचत करती है, बल्कि खेती की लागत (खर्च) को घटाने और श्रम (मजदूरी) को कम करने में भी अत्यधिक मददगार साबित होती है।
​इस अवसर पर उपस्थित उत्तर प्रदेश किसान सभा के जिला संयोजक और सीपीआईएम जिला कमेटी सदस्य कामरेड बाज सिंह भुल्लर ने कहा कि वैज्ञानिक विधियों से खेती करके हमारे किसान न सिर्फ अपना उत्पादन बढ़ा रहे हैं, बल्कि गांव और जिले का नाम भी रोशन कर रहे हैं। उन्होंने किसानों से नई तकनीकों को अधिक से अधिक बढ़ावा देने की अपील की। प्रगतिशील किसान नवजोत भुल्लर ने बताया कि इस बार उन्होंने डीएसआर बुवाई के लिए विशेष रूप से एक आधुनिक मशीन खरीदी है, जिसके माध्यम से उन्होंने अपने साथ-साथ आसपास के अन्य किसानों की लगभग 70 एकड़ भूमि पर भी इसी पद्धति से धान की बुवाई करवाई है।
​इस महत्वपूर्ण निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान उपकृषि निदेशक राम मिलन परिहार, जिला कृषि अधिकारी विनीत कुमार, मरौरी के सहायक विकास अधिकारी मुकेश कुमार, कृषि बीज भंडार मरौरी के प्रभारी अमर सिंह और कृषि न्याय पंचायत जमुनिया के प्राविधिक सहायक प्रेम शंकर सहित कृषि विभाग के कई अन्य अधिकारी व स्थानीय किसान मौजूद रहे।

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