पीलीभीत। प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए पीलीभीत स्थित ‘ओम लॉन’ में एक विशेष ‘वन नाइट मॉथिंग सेशन’ का आयोजन किया गया।
पलिया के प्रकृति प्रेमी एवं संस्थापक अपूर्व गुप्ता ने जैव विविधता में कीट-पतंगों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कीट-पतंगे केवल प्रकृति की सुंदरता ही नहीं बढ़ाते, बल्कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि मधुमक्खियों और तितलियों की तरह पतंगे (मॉथ) भी पौधों के परागण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। अनेक पतंगे रात्रिचर होते हैं, इसलिए वे रात में खिलने वाले फूलों और कई पौधों के परागण का प्रमुख माध्यम बनते हैं।
उन्होंने बताया कि खाद्य श्रृंखला में भी कीट-पतंगों और उनके लार्वा का महत्वपूर्ण स्थान है। ये पक्षियों, चमगादड़ों, मेंढकों, छिपकलियों तथा अन्य छोटे जीवों के लिए भोजन का प्रमुख और पौष्टिक स्रोत हैं। इसके अलावा पतंगे पर्यावरण में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों, जैसे प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन तथा कीटनाशकों के प्रभाव के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं। इनकी संख्या में होने वाले बदलावों के आधार पर वैज्ञानिक पर्यावरण के स्वास्थ्य का आकलन करते हैं।
पोषक तत्वों के चक्र में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनके लार्वा पत्तियों एवं जैविक अवशेषों का विघटन कर मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायता करते हैं।
अपूर्व गुप्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का तराई क्षेत्र, जिसमें पीलीभीत, दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, लखीमपुर खीरी आदि क्षेत्र शामिल हैं, अपने नम जंगलों, घास के मैदानों और जल निकायों के कारण जैव विविधता से अत्यंत समृद्ध है। इस क्षेत्र में तितलियों एवं पतंगों की सैकड़ों प्रजातियाँ दर्ज की जा चुकी हैं।
सुरभि गुप्ता ने बताया कि इस क्षेत्र में एटलस मॉथ, मून मॉथ और टाइगर मॉथ जैसे आकर्षक पतंगों के साथ-साथ कॉमन मॉरमन तथा लाइम बटरफ्लाई जैसी तितलियाँ भी पाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में ‘नेशनल मॉथ वीक (National Moth Week)’ मनाया जाता है। मानसून के दौरान नमी और वनस्पति की प्रचुरता के कारण पतंगों की गतिविधियाँ, प्रजनन और विविधता अपने चरम पर होती हैं। यही समय इनके अध्ययन और फोटोग्राफी के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

युवा वन्यजीव प्रेमी क़ासिम ने बताया कि नेशनल मॉथ वीक की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी। इसका उद्देश्य लोगों को रात के समय प्रकाश की ओर आकर्षित होने वाले पतंगों का अवलोकन करने, उनकी तस्वीरें लेने तथा उनके आँकड़े ऑनलाइन साझा करने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि तितलियों की तुलना में पतंगों को अक्सर कम आकर्षक या हानिकारक समझकर अनदेखा कर दिया जाता है, जबकि वे पारिस्थितिकी तंत्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इस अभियान के माध्यम से दुनिया भर में लोगों को पतंगों के महत्व और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाता है।
हॉबीज़ हेरिटेज एंड रिसर्च ट्रस्ट के सचिव हर्षल सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर वन्यजीव जैव विविधता संरक्षण समिति के महासचिव डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री, ज्योति सिंह, हर्षित सिंह, मोहित अग्रवाल, वशिता अग्रवाल, विक्रमसेन सक्सेना, राकेश कुमार, राजेश गंगवार, विनायक सक्सेना, विश्व प्रकृति निधि के लवप्रीत सिंह, राजेन्द्र कुमार, शिवम कश्यप, अनस गौहर सहित अनेक प्रकृति प्रेमी उपस्थित रहे।