रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर में अवैध कच्ची शराब के खिलाफ आबकारी विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। विभाग की ओर से छापेमारी कर अवैध शराब बरामद करने के साथ ही आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। इसके बावजूद रुद्रपुर शहर की कई गलियों और आबादी वाले इलाकों में कच्ची शराब की बिक्री पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जिला आबकारी अधिकारी महेन्द्र बिष्ट के आदेश पर निरीक्षक सोनू सिंह के नेतृत्व में 15 अगस्त को क्षेत्र-01 रुद्रपुर आबकारी टीम और जनपदीय प्रवर्तन दल ने ग्राम रायपुर-अर्जुनपुर में संयुक्त कार्रवाई की। टीम ने खेतों में छिपाकर रखी गई करीब 170 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद की।
आबकारी विभाग के अनुसार, टीम ने दो ट्यूबों से करीब 110 लीटर और दो कपड़े के थैलों से लगभग 60 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद की। मौके से किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की संबंधित धाराओं में अभियोग दर्ज किया गया है।
कार्रवाई के दौरान क्षेत्र-01 रुद्रपुर के आबकारी निरीक्षक सोनू सिंह के नेतृत्व में उप आबकारी निरीक्षक देवेन्द्र कुमार और विजेंद्र जीना, प्रधान आबकारी सिपाही विकास रावत तथा आबकारी सिपाही राजेंद्र, वीरेंद्र, मंजू, राखी और बलजीत शामिल रहे।
कार्रवाई के बावजूद बिक्री पर उठ रहे सवाल
आबकारी विभाग की इस कार्रवाई से साफ है कि अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, दूसरी ओर शहर के आबादी वाले इलाकों में कच्ची शराब की उपलब्धता को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल भी उठ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अवैध शराब बनाने और रखने वाले ठिकानों पर लगातार छापेमारी हो रही है और बड़ी मात्रा में शराब बरामद की जा रही है, तो आखिर यह शराब शहर की गलियों तक कैसे पहुंच रही है।
अवैध शराब के कारोबार की पूरी कड़ी को तोड़ने के लिए केवल शराब बरामद करना ही पर्याप्त नहीं माना जा सकता। शराब तैयार करने वाले ठिकानों से लेकर उसे सप्लाई करने वाले नेटवर्क और अंतिम विक्रेताओं तक पहुंचने वाले लोगों की पहचान करना भी चुनौती है।
स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा
अवैध तरीके से तैयार की जाने वाली कच्ची शराब की गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल होने वाले पदार्थों की कोई निश्चितता नहीं होती। ऐसे में इसके सेवन से गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा होने की आशंका बनी रहती है।
कम कीमत और आसानी से उपलब्धता के कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बीच इसकी बिक्री की शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे में अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई के साथ-साथ सप्लाई नेटवर्क की पहचान और उसके खिलाफ सख्त कदम उठाना भी जरूरी है।