रुद्रपुर। रुद्रपुर क्षेत्र में सड़क हादसे में घायल 23 वर्षीय युवक की जिला अस्पताल में मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि घायल युवक को अस्पताल पहुंचाने के बाद भी करीब 45 मिनट तक समुचित उपचार नहीं मिल सका। इसी दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होने से उसकी हालत बिगड़ती चली गई और कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम नंदपुर निवासी 23 वर्षीय जितेन्द्र पुत्र कल्याण सिंह अनहद ग्रुप ऑफ इंडस्ट्री में काम करता था। बताया गया कि गुरुवार सुबह करीब 8 बजे वह अपने कार्यस्थल के नजदीक पहुंचने से पहले दुर्घटना का शिकार हो गया। हादसे में उसकी बाइक डिवाइडर से टकरा गई, जिसके बाद वह करीब 35 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरा।
35 फीट गहराई से घायल को निकाला
दुर्घटना की सूचना मिलते ही समीप स्थित अनहद ग्रुप के प्लांट हेड नरेश अरोड़ा अपने साथियों अमित चौधरी, साहब सिंह और सुखदेव आदि के साथ मौके पर पहुंचे। बताया गया कि उन्होंने घायल जितेन्द्र को करीब 35 फीट गहराई से बाहर निकाला और एंबुलेंस के लिए 108 पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन फोन नहीं लग सका।
इसके बाद घायल को निजी वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। आरोप है कि अस्पताल की इमरजेंसी में घायल को तत्काल उपचार नहीं मिल सका। बताया गया कि जितेन्द्र दर्द से कराहते हुए मदद की गुहार लगाता रहा। साथ आए लोगों ने अस्पताल के कर्मचारियों से तत्काल उपचार की अपील की।
उपचार शुरू होने तक बिगड़ गई हालत
आरोप है कि काफी प्रयास के बाद डॉक्टर राजीव इलाज के लिए पहुंचे, लेकिन तब तक घायल की हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। बताया गया कि अत्यधिक रक्तस्राव के चलते जितेन्द्र की हालत लगातार बिगड़ती गई और करीब 10 मिनट बाद उसकी मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलने पर समाजसेवी सुशील गाबा भी जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मृतक के माता-पिता और परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया।
सुशील गाबा ने की निष्पक्ष जांच की मांग
सुशील गाबा ने घटना को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताते हुए पूरे मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि यह आरोप सही है कि घायल को समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण अत्यधिक रक्तस्राव से उसकी जान गई, तो यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
उन्होंने मांग की कि जिला अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज, इमरजेंसी रजिस्टर, डॉक्टरों और स्टाफ की ड्यूटी, उपचार से संबंधित रिकॉर्ड तथा अन्य दस्तावेजों की जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
“हर घायल को समय पर इलाज मिलना उसका अधिकार”
सुशील गाबा ने कहा कि सरकारी अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज को समय पर उपचार मिलना चाहिए। किसी घायल की जान केवल इस वजह से नहीं जानी चाहिए कि उसे समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। उन्होंने प्रशासन से जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की।
घटना के दौरान नरेश अरोड़ा, ललित सिंह बिष्ट, जुगनू गुड़िया, स्वरूप सिंह, ग्राम प्रधान गुरदेव सिंह, सुरेश सिंह, अनिल चौधरी, साहब सिंह, सुखदेव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
(नोट: जिला अस्पताल में उपचार में देरी और लापरवाही से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र/आधिकारिक पुष्टि अभी प्रतीक्षित है। मामले की जांच के बाद ही जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।)