पश्चिम बंगाल विधानसभा में ‘नेता प्रतिपक्ष’ की नियुक्ति को लेकर जारी भीषण कानूनी और राजनीतिक लड़ाई के बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गुट को एक बहुत बड़ा झटका दिया है। विधानसभा स्पीकर द्वारा बागी टीएमसी (TMC) गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी को आधिकारिक रूप से नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किए जाने के फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी के वफादार विधायकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं ने स्पीकर के इस आदेश पर तुरंत अंतरिम रोक लगाने और मामले की तत्काल सुनवाई करने की मांग की थी। हालांकि, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस पूरे मामले पर सुनवाई करते हुए फिलहाल स्पीकर के फैसले पर किसी भी प्रकार की रोक लगाने या ममता गुट को कोई अंतरिम राहत देने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। अदालत के इस कड़े रुख के बाद विधानसभा के भीतर ऋतब्रत बनर्जी की स्थिति और मजबूत हो गई है, जबकि पार्टी पर नियंत्रण की कोशिशों में जुटी ममता बनर्जी और उनके समर्थकों की कानूनी मुश्किलें अब और ज्यादा बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं। [1]