-भारत पर्व आत्मनिर्भर भारत का जीवंत उदाहरण है

-कलाकार, शिल्पकार और सशस्त्र बल भारत की सांस्कृतिक एवं नैतिक शक्ति के स्तंभ हैं: लोक सभा अध्यक्ष

-भारत पर्व एक ऐसा अनुभव है जो जोड़ता है, प्रेरित करता है और गर्व का भाव जगाता है: लोक सभा अध्यक्ष

लोक सभा अध्यक्ष ने लाल क़िले प्रांगण में भारत पर्व का उद्घाटन किया

लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक लाल क़िले के प्रांगण में भारत पर्व का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत पर्व को भारत की आत्मा की सजीव और सशक्त अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि यह ऐसा उत्सव है जहाँ संस्कृति, लोकतंत्र, सृजनशीलता और राष्ट्रीय एकता एक साथ मूर्त रूप में दिखाई देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि किया कि भारत पर्व केवल एक सांस्कृतिक आयोजन मात्र नहीं है, बल्कि यह उन संविधानिक मूल्यों की सशक्त स्मृति है जो देश को एक सूत्र में बाँधते हैं। श्री बिरला ने कहा कि भारत पर्व भारत आत्मनिर्भर भारत का जीवंत उदाहरण है। 

गणतंत्र दिवस के महत्व का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि भारत की शक्ति उसके संविधान में निहित है, जो लोकतंत्र, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने हर्ष व्यक्त किया कि भारत पर्व इन आदर्शों और जनता के बीच एक सजीव सेतु का कार्य करता है तथा संस्कृति, परंपरा और सामूहिक उत्सव के माध्यम से संविधानिक मूल्यों को जनसुलभ बनाता है। उन्होंने कहा कि कला, शिल्प, व्यंजन, संगीत और विचारों के माध्यम से भारत पर्व नागरिकों को एक भारत, श्रेष्ठ भारत का साकार अनुभव कराता है और इस धारणा को सुदृढ़ करता है कि लोकतंत्र तब फलता-फूलता है जब लोग अपनी विरासत और एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं।

नागरिक सहभागिता, विशेषकर युवाओं की भूमिका, पर प्रकाश डालते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि संस्कृति से जुड़कर युवा अपनी जड़ों से पुनः जुड़ते हैं और साथ ही राष्ट्रीय मूल्यों एवं नवाचार पर आधारित भविष्य का निर्माण करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत पर्व जैसे आयोजन पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त बनाते हैं और हस्तशिल्प, हथकरघा तथा स्थानीय व्यंजनों के माध्यम से आजीविका सृजन कर आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को बल प्रदान करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि संस्कृति केवल पहचान नहीं है, बल्कि अवसर भी है।

भारत पर्व की समावेशिता को इसकी सबसे बड़ी विशेषता बताते हुए श्री बिरला ने कहा कि इस उत्सव में आगंतुक गणतंत्र दिवस समारोह की भव्यता, सशस्त्र बलों की प्रेरक प्रस्तुतियाँ, देश के प्रत्येक क्षेत्र की सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ, रंग-बिरंगे हस्तशिल्प एवं हथकरघा बाज़ार, अखिल भारतीय व्यंजनालय तथा जीवंत लोक कला प्रस्तुतियाँ देख सकते हैं। ये सभी तत्व मिलकर भारत की बहुलतावादी पहचान का एक  सशक्त चित्र प्रस्तुत करते हैं तथा यह दर्शाते हैं कि विविधता भारत की चुनौती नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।

कलाकारों, लोक कलाकारों, संगीतकारों और शिल्पकारों को शुभकामना देते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने उन्हें भारत की जीवंत परंपराओं के संरक्षक तथा देश की सांस्कृतिक एवं नैतिक शक्ति के स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि उनका सृजन केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी ज्ञान, मूल्य और कौशल के हस्तांतरण का माध्यम है। भारत पर्व उन्हें सम्मान, पहचान और आजीविका का गरिमामय मंच प्रदान करता है। उन्होंने सशस्त्र बलों को  नमन किया और कहा कि उनकी अनुशासित प्रस्तुतियाँ सेवा, त्याग और देशभक्ति जैसे मूल्यों को प्रतिबिंबित करती हैं। जब संस्कृति और सुरक्षा एक ही मंच साझा करते हैं, तो राष्ट्रीय आत्मविश्वास और सामूहिक संकल्प और अधिक सुदृढ़ होता है।

आयोजन स्थल के प्रतीकात्मक महत्व पर प्रकाश डालते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने लाल क़िले को केवल एक ऐतिहासिक धरोहर ही नहीं, अपितु भारत की सामूहिक स्मृति बताया। उन्होंने कहा कि इसी स्थल से कभी स्वतंत्रता के स्वप्न ने आकार लिया था और आज यही स्थान भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास के गौरवशाली प्रदर्शन का मंच है। लाल क़िले पर इतिहास और आधुनिकता का यह संगम राष्ट्र को प्रेरित करता है कि वह अपनी सभ्यतागत जड़ों में निहित रहते हुए प्रगति के पथ पर आगे बढ़े।

सामूहिक उत्तरदायित्व पर बल देते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने नागरिकों से भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संरक्षण केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की साझा जिम्मेदारी है—जिसे भारत पर्व प्रभावी रूप से सुदृढ़ करता है। उन्होंने संस्कृति मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, राज्य सरकारों, सहयोगी संस्थाओं, कलाकारों, स्वयंसेवकों और आयोजन से जुड़े सभी हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि भारत पर्व देश-विदेश से आए आगंतुकों के लिए एक स्मरणीय अनुभव सिद्ध होगा।

अपने संबोधन का समापन करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत पर्व एक ऐसा अनुभव है जो लोगों को जोड़ता है, प्रेरित करता है और गर्व की अनुभूति कराता है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे इस भावना को पूरे वर्ष जीवंत रखें—स्थानीय कला को अपनाकर, शिल्पकारों का सम्मान करके, भाषाओं और परंपराओं का संरक्षण करके तथा दैनिक जीवन में लोकतांत्रिक मूल्यों को आत्मसात करके।

इस अवसर पर केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

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