चंडीगढ़/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के रण में मिली ऐतिहासिक सफलता के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अब अपना अगला लक्ष्य ‘पंजाब’ तय कर लिया है। ‘मिशन पंजाब’ के तहत पार्टी ने राज्य की सियासत को पूरी तरह बदलने के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। गृह मंत्री अमित शाह खुद इस मोर्चे की कमान संभाल रहे हैं और जल्द ही राज्य में नशे के कारोबार के खिलाफ एक निर्णायक अभियान शुरू करने जा रहे हैं।
मोदी का चेहरा और शाह की रणनीति
पंजाब फतह के लिए भाजपा ने अपनी सबसे सफल ‘मोदी-शाह’ की जोड़ी पर दांव लगाया है। जहाँ एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सिख समुदाय के लिए किए गए ऐतिहासिक कार्यों (जैसे करतारपुर कॉरिडोर और वीर बाल दिवस) को घर-घर पहुँचाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर गृह मंत्री अमित शाह की ‘चाणक्य नीति’ के जरिए बूथ स्तर पर संगठन को अभेद्य बनाया जा रहा है।
‘एकला चलो’ की रणनीति पर मुहर
भाजपा ने इस बार किसी भी क्षेत्रीय दल के साथ गठबंधन न करते हुए अकेले चुनाव लड़ने का साहसी फैसला लिया है। पार्टी का मानना है कि पंजाब की जनता अब एक मजबूत राष्ट्रीय विकल्प की तलाश में है। इसके लिए जमीनी स्तर पर व्यापक प्रचार और वर्तमान सरकार की विफलताओं को उजागर करने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं।
नशा मुक्त पंजाब का संकल्प
पंजाब में गहराई तक फैले नशे के जाल को भाजपा ने अपना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया है। गृह मंत्री अमित शाह के आगामी दौरों का मुख्य केंद्र ‘नशा मुक्त पंजाब’ होगा। पार्टी का दावा है कि बंगाल की तरह ही पंजाब की जनता भी इस बार बदलाव के लिए तैयार है और राज्य को ‘भगवामय’ करने के लिए संगठन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।