चंडीगढ़। पंजाब को पूरी तरह से मादक पदार्थों और नशे के जाल से मुक्त कराने के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में संचालित किए जा रहे राज्यव्यापी ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ महा-अभियान ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व सफलता का मील का पत्थर पार कर लिया है। पंजाब सरकार द्वारा मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, इस कड़े अभियान के अंतर्गत राज्य पुलिस और एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने बड़ी विधिक कार्रवाई करते हुए नशा तस्करों की कुल 847 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को ज़ब्त करने के साथ-साथ पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। इसके अतिरिक्त, राज्य के विभिन्न जनपदों में चलाए गए सघन चेकिंग और दबिश अभियानों के दौरान अब तक रिकॉर्ड 73,000 छोटे-बड़े मादक पदार्थ तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

इस विशेष नशामुक्त अभियान के सफलतापूर्वक 500 दिन पूरे होने के उपलक्ष्य में पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने मीडिया को संबोधित करते हुए अभियान की विस्तृत सफलता का खाका प्रस्तुत किया. स्वास्थ्य मंत्री ने इस जंग में स्थानीय नागरिकों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि जनता ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए तस्करों और संदिग्ध सप्लायरों की गुप्त गतिविधियों के बारे में सीधे पुलिस कंट्रोल रूम को सटीक खुफिया जानकारियां दी हैं, जिससे इस मुहिम को जमीनी स्तर पर इतनी भारी सफलता मिल सकी है. उन्होंने आधिकारिक आंकड़े साझा करते हुए सनसनीखेज खुलासा किया कि पिछले चार वर्षों की समयावधि में राज्य भर के विभिन्न संवेदनशील और सीमावर्ती रूटों से नशा तस्करों के चंगुल से कुल 6,600 किलोग्राम से भी अधिक उच्च गुणवत्ता वाली कीमती हेरोइन (ड्रग्स) बरामद की गई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत अरबों रुपये आंकी गई है।

गृह मंत्रालय और पंजाब पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के तहत पकड़े गए इन 73 हजार से अधिक आरोपियों में से कई अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के मुख्य सरगना भी शामिल हैं, जो ड्रोन और सीमा पार कूरियर नेटवर्क के जरिए पंजाब के युवाओं तक नशीले पदार्थों की खेप पहुंचा रहे थे। स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल तस्करों की धरपकड़ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके समानांतर राज्य के सभी प्रभावित जिलों में अत्याधुनिक नशामुक्त पुनर्वास केंद्रों और ओओएटी (OOAT) क्लीनिकों का जाल भी बिछाया जा रहा है, ताकि गुमराह हुए युवाओं का उचित चिकित्सकीय उपचार कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ा जा सके। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में नशा माफियाओं और उनके शरणदाताओं के खिलाफ इस कार्रवाई को और अधिक कड़ा तथा आक्रामक बनाया जाएगा।


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