पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बढ़ता असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। टीएमसी की चार बार सांसद रह चुकीं Satabdi Roy ने पार्टी नेतृत्व और कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में केवल कुछ चुनिंदा नेताओं की बात सुनी जाती थी, जबकि अन्य सांसदों और नेताओं की समस्याओं एवं सुझावों को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा।
एक इंटरव्यू में शताब्दी रॉय ने कहा कि जब भी उन्होंने या अन्य नेताओं ने संगठन और जनता से जुड़े मुद्दे उठाने की कोशिश की, उन्हें चुप रहने की सलाह दी गई। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर वर्षों से चली आ रही समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया और कई नेताओं की आवाज दबा दी गई। रॉय ने कहा कि वह अपने क्षेत्र के लोगों के लिए काम करना चाहती थीं, लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं सुनी और केवल कुछ खास लोगों की ही पहुंच Mamata Banerjee तक थी।
उन्होंने पार्टी में बढ़ते भ्रष्टाचार को भी अपनी नाराजगी का प्रमुख कारण बताया। उनका कहना था कि संगठन के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं, जिससे वह बेहद निराश थीं। शताब्दी रॉय ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ममता बनर्जी के नेतृत्व और व्यवहार में बदलाव आया है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि ममता बनर्जी के साथ उनका भावनात्मक रिश्ता रहा है, लेकिन उनके लिए जनता के हित और काम सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।
गौरतलब है कि शताब्दी रॉय को हाल ही में बागी सांसदों के समूह का उपनेता चुना गया है। इस समूह की भाजपा नेताओं से मुलाकात के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि टीएमसी के कुछ सांसद भविष्य में अलग राजनीतिक रास्ता अपना सकते हैं। इससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है।