पीलीभीत। कलेक्ट्रेट परिसर में संविदा लाइनमैन विजय राठौर की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस हादसे ने जहाँ पीड़ित परिवार को गहरे गम में डुबो दिया है, वहीं राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने इस घटना को सामान्य हादसा मानने से साफ इनकार करते हुए इसे सीधे तौर पर “व्यवस्था की विफलता” करार दिया है।
पार्टी के जिलाध्यक्ष अनिल चौधरी और नगर अध्यक्ष वीरेन्द्र रस्तोगी के नेतृत्व में रालोद का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को जिलाधिकारी से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपेगा। रालोद की मुख्य मांग है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय हो और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।
रालोद नेताओं ने विभाग की सुरक्षा तैयारियों पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि जिस युवक को बिजली के पोल पर चढ़ाकर काम कराया जा रहा था, उसके पास सुरक्षा के पर्याप्त उपकरण (सेफ्टी किट) तक नहीं थे। इसके साथ ही पार्टी ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या पोल पर काम शुरू करने से पहले तय की गई जरूरी सुरक्षा प्रक्रियाओं और शटडाउन के नियमों का सही ढंग से पालन किया गया था या नहीं?
घटना के बाद घायल विजय को समय पर उचित चिकित्सा न मिल पाने के आरोपों पर भी रालोद ने गहरी नाराजगी जताई है। नेताओं का कहना है कि जब घायल युवक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था, तब भी सरकारी तंत्र की रफ्तार बेहद सुस्त बनी रही। जिलाध्यक्ष अनिल चौधरी ने चेताया कि यदि संविदा कर्मचारियों की सुरक्षा केवल कागजी दावों तक सीमित रहेगी, तो ऐसे हादसों को रोक पाना मुमकिन नहीं होगा। वहीं, नगर अध्यक्ष वीरेन्द्र रस्तोगी ने साफ कहा कि यदि जल्द ही दोषियों पर जवाबदेही तय नहीं की गई, तो पार्टी सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी।
यह पूरा मामला सिर्फ एक लाइनमैन की जान जाने का नहीं, बल्कि उन तमाम संविदा कर्मियों की सुरक्षा से जुड़ा है जो रोज अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं। अब देखना यह होगा कि शहर में बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाने वाले तथाकथित समाजसेवी और चुनाव में जनता के द्वार पहुँचने वाले जनप्रतिनिधि इस पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आते हैं या फिर यह मामला भी वक्त के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा। मानवता को झकझोर देने वाली इस घटना ने समाज और स्थानीय राजनीति दोनों की संवेदनशीलता को कसौटी पर ला खड़ा किया है।