रुद्रपुर। उत्तराखंड के जनपद ऊधम सिंह नगर में न्याय प्रणाली को सरल, सुलभ और त्वरित बनाने के विधिक विज़न के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) ने कमर कस ली है। आगामी 18 जुलाई 2026 को जिला मुख्यालय सहित जिले के विभिन्न बाह्य दीवानी न्यायालयों में एक वृहद ‘विशेष लोक अदालत’ का आयोजन किया जा रहा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उधम सिंह नगर की सचिव श्रीमती ममता पंत द्वारा इस विशेष लोक अदालत को सफल बनाने के उद्देश्य से निरंतर एवं हरसंभव प्रशासनिक व विधिक प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि न्यायालयों में वर्षों से लंबित मुकदमों के बोझ को कम किया जा सके और वादियों को त्वरित न्याय मिल सके।
एन.आई. एक्ट (चेक बाउंस) के मामलों के त्वरित निस्तारण पर रहेगा मुख्य फोकस
प्राप्त प्रामाणिक और आधिकारिक विधिक विवरण के अनुसार, इस विशेष लोक अदालत के अंतर्गत मुख्य रूप से एन.आई. एक्ट (Negotiable Instruments Act) यानी चेक बाउंस के गंभीर दीवानी मामलों, बैंक रिकवरी, श्रम विवाद, बिजली-पानी के बिल संबंधी विवादों और शमनीय (आपसी समझौते योग्य) फौजदारी मामलों का निस्तारण किया जाएगा। प्राधिकरण की सचिव श्रीमती ममता पंत ने स्पष्ट किया कि चेक बाउंस और अन्य वित्तीय विवादों को यदि आपसी विधिक समझौते के आधार पर सुलझाया जाए, तो इससे न केवल दोनों पक्षों के समय और धन की बचत होती है, बल्कि समाज में सौहार्दपूर्ण वातावरण भी निर्मित होता है। लोक अदालत के जरिए निस्तारित हुए मामलों की विधिक अपील किसी उच्च न्यायालय में नहीं होती, जिससे मामला हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
रुद्रपुर सहित काशीपुर, जसपुर, खटीमा और बाजपुर दीवानी न्यायालयों में मिलेगी सुविधा
प्राधिकरण की सचिव श्रीमती ममता पंत ने जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों के वादकारियों और आम जनता से पुरजोर अपील की है कि वे अपने लंबित मामलों के शीघ्र एवं सम्मानजनक निस्तारण हेतु 13 जुलाई से लेकर 18 जुलाई 2026 तक संबंधित न्यायालयों के विधिक काउंटरों से संपर्क स्थापित करें। 18 जुलाई को मुख्य जिला न्यायालय रुद्रपुर के साथ-साथ बाह्य दीवानी न्यायालय काशीपुर, जसपुर, खटीमा तथा बाजपुर आदि सभी विधिक केंद्रों में पीठासीन अधिकारियों की खंडपीठें मुस्तैदी से बैठेंगी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मूल संवैधानिक उद्देश्य समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक न्याय की सरल व सुलभ पहुंच सुनिश्चित करना है, और इस विशेष लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक वादों का सौहार्दपूर्ण समाधान विधिक रूप से सुनिश्चित कराया जाएगा।