आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद अंतर्गत थाना सैंया क्षेत्र में पुलिस, वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण संस्था ‘वाइल्डलाइफ एसओएस’ (Wildlife SOS) को एक संयुक्त ऑपरेशन में बड़ी सफलता हाथ लगी है। टीम ने वन्यजीवों के अंगों और खाल की तस्करी करने वाले एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया है। अभियुक्तों के कब्जे से प्रतिबंधित वन्यजीव तेंदुए की 10 बहुमूल्य खालें बरामद की गई हैं, जिनकी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस विशिष्ट गिरोह के सक्रिय होने की इनपुट पिछले काफी समय से मिल रही थी। वन विभाग की खुफिया विंग पिछले तीन महीनों से इस गिरोह के संदिग्ध सदस्यों और उनके मूवमेंट की लगातार निगरानी कर रही थी। तस्करों को रंगे हाथों पकड़ने के लिए विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस के एक्सपर्ट्स ने एक गोपनीय रणनीति तैयार की, जिसके तहत अधिकारियों ने स्वयं फर्जी ग्राहक बनकर तस्करों से संपर्क साधा और करोड़ों रुपये की डील फाइनल कर उन्हें डिलीवरी के लिए आगरा के थाना सैंया क्षेत्र में बुलाया।
निर्धारित स्थान पर जैसे ही तस्कर प्रतिबंधित माल की डिलीवरी देने पहुंचे, पहले से घात लगाकर बैठी पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने चारों तरफ से घेराबंदी कर उन्हें मौके पर ही दबोच लिया। तलाशी लेने पर उनके पास से बड़ी संख्या में तेंदुए की खालें देखकर अधिकारी भी स्तब्ध रह गए। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान हरियाणा, मध्य प्रदेश और मुरैना (एमपी) के निवासियों के रूप में हुई है, जिससे यह साफ होता है कि इस रैकेट के तार कई राज्यों में फैले हुए हैं।
पुलिस और आबकारी व वन विभाग की संयुक्त टीमें पकड़े गए तस्करों से कड़ाई से पूछताछ कर रही हैं। शुरुआती पूछताछ में गिरोह के मुख्य सरगना और देशव्यापी सप्लाई चेन से जुड़े कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह किसी बड़े अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का हिस्सा है जो भारत के संरक्षित वनों से अवैध शिकार कर खालों को विदेशी बाजारों में ऊंचे दामों पर बेचता है। पुलिस ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई तेज कर दी है।