सितारगंज: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के सितारगंज में सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों ने शनिवार को बेहद हर्षोल्लास और भव्यता के साथ 57वीं वाहिनी का 15वां स्थापना दिवस मनाया। इस खास अवसर पर वाहिनी परिसर में विभिन्न रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें एसएसबी के बहादुर जवानों और उनके परिवार के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान जवानों ने देश की ‘विविधता में एकता’ की अनूठी झलक पेश की।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जवानों ने बांधा समां
स्थापना दिवस समारोह के दौरान आयोजित सांस्कृतिक संध्या में जवानों और उनके बच्चों ने विभिन्न राज्यों के पारंपरिक लोक नृत्यों, देशभक्ति गीतों और एक ज्ञानवर्धक लघु नाटक (नुक्कड़ नाटक) के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधताओं का अनूठा प्रदर्शन किया। इन मनमोहक प्रस्तुतियों ने परिसर में मौजूद सभी दर्शकों को राष्ट्रभक्ति की भावना से सराबोर कर दिया।

6 जून 2012 को जामनगर में हुई थी स्थापना
समारोह को संबोधित करते हुए 57वीं वाहिनी के कमांडेंट गंगा सिंह उदावत ने वाहिनी के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस वाहिनी की स्थापना 6 जून 2012 को गुजरात के जामनगर में की गई थी। तब से लेकर आज तक वाहिनी के जांबाज सिपाही निरंतर देश की आंतरिक व बाह्य सीमा सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, जन कल्याणकारी योजनाओं और राष्ट्र सेवा के कार्यों में हमेशा अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

सिर्फ सीमा सुरक्षा नहीं, नागरिकों में राष्ट्रभक्ति जगाना भी उद्देश्य
कमांडेंट गंगा सिंह उदावत ने बल के मूल सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए कहा कि एसएसबी का उद्देश्य केवल सीमाओं की चौकेसी और रक्षा करने तक ही सीमित नहीं है। इसके विपरीत, यह बल सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों के बीच जाकर उनमें देशप्रेम, आपसी भाईचारे, सुरक्षा की भावना और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने का भी निरंतर कार्य करता है। इस भव्य स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर उप कमांडेंट दीपक सिंह जयाड़ा, उप कमांडेंट अनिल कुमार यादव, डॉ. सचिन खैची सहित वाहिनी के तमाम अधिकारी, अधीनस्थ अधिकारी और बड़ी संख्या में जवान व उनके परिजन उपस्थित रहे।

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