​पीलीभीत। समाजवादी पार्टी के जिला महासचिव नफीस अहमद अंसारी के विरुद्ध कोतवाली पीलीभीत में दर्ज हुए मुकदमे को कथित तौर पर फर्जी बताते हुए सपा के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की। सपा नेताओं ने इस पूरे प्रकरण को सत्ता पक्ष के दबाव में की गई द्वेषपूर्ण कार्रवाई करार देते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।
​पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए ज्ञापन में प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि समाजवादी पार्टी का जिला कार्यालय पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद नगर पालिका प्रशासन द्वारा असंवैधानिक और मनमाने तरीके से कार्यालय को खाली कराकर सामान जब्त कर लिया गया और बाद में भवन को ध्वस्त कर दिया गया। इन परिस्थितियों में जिला महासचिव नफीस अहमद अंसारी ने संगठनात्मक कार्यों और बैठकों के लिए अपनी निजी संपत्ति (गैरेज) को बिना किसी किराए या लिखित अनुबंध के पार्टी को उपलब्ध कराया था। नेताओं का आरोप है कि यह पूरी तरह उनकी निजी संपत्ति है, लेकिन राजनीतिक द्वेष भावना के चलते उन पर गलत तरीके से मुकदमा दर्ज कर विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
​सपा नेताओं ने कहा कि हाल ही में जनसमस्याओं को लेकर किए गए धरना-प्रदर्शनों और विभिन्न दलों के नेताओं के समाजवादी पार्टी में शामिल होने से सत्ता पक्ष घबराया हुआ है। इसी कारण सपा नेताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर पार्टी को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक से मांग की कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविकता को सामने लाया जाए।
​इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से बीसलपुर विधानसभा की पूर्व प्रत्याशी दिव्या गंगवार, जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र मिश्रा कट्टर, युवजन सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजकुमार राजू, जिला उपाध्यक्ष अकबर अंसारी, मखदूम खान, जिला कोषाध्यक्ष गयासुद्दीन मंसूरी, विधानसभा अध्यक्ष इम्तियाज अल्वी, पिछड़ा वर्ग के प्रदेश सचिव सत्येंद्र मौर्य, पिछड़ा वर्ग के जिला अध्यक्ष निरंजन गंगवार, अल्पसंख्यक सभा के जिला उपाध्यक्ष गुरजोवन सिंह, जिला सचिव दिनेश वर्मा, देव कुमार मौर्य, अभि गंगवार और मोहम्मद सलीम सहित कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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