विधि संवाददाता, पीलीभीत। अपर सत्र न्यायाधीश महेशानंद झा की अदालत ने विवाहिता की हत्या के चर्चित मामले में बुधवार को अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी पति, सास और ससुर को दोषमुक्त कर दिया है। इसके साथ ही, अदालत ने मामले के वादी द्वारा न्यायालय में मिथ्या (झूठे) साक्ष्य प्रस्तुत करने को गंभीरता से लेते हुए उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही करने का कड़ा आदेश जारी किया है।
दहेज हत्या का लगाया गया था आरोप
अभियोजन कथानक के अनुसार, थाना जहानाबाद क्षेत्र के निवासी छत्रपाल ने 4 नवंबर 2024 को पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनकी पुत्री शशि गंगवार की शादी 27 फरवरी 2024 को ग्राम कल्याणपुर चक्रतीर्थ निवासी प्रमोद कुमार के साथ हुई थी। आरोप था कि विवाह के बाद से ही पति प्रमोद, सास मनी, ससुर बाबूराम और परिवार के अन्य सदस्य कम दहेज का ताना देकर नगदी, एलईडी और सोने की चेन की मांग कर रहे थे। वादी ने शिकायत की थी कि मांग पूरी न होने पर 2 नवंबर 2024 को आरोपियों ने उसकी पुत्री की हत्या कर दी।
जांच और अदालती कार्यवाही
पुलिस ने मामले की विवेचना के बाद पति प्रमोद कुमार, सास मनी उर्फ धर्मवती और ससुर बाबूराम को दोषी पाते हुए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से वादी छत्रपाल सहित कई गवाहों को अदालत में पेश किया गया। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए आरोपियों को निर्दोष बताया।
न्यायालय का निर्णय
माननीय न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का गहन अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपियों के विरुद्ध अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। इसके आधार पर तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया। न्यायालय ने इस बात पर कड़ा रुख अपनाया कि वादी ने अदालत में झूठे साक्ष्य पेश कर न्याय प्रक्रिया को गुमराह करने का प्रयास किया, जिसके चलते अब वादी के विरुद्ध ही कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
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