लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विजिलेंस विभाग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विजिलेंस ने सिंचाई विभाग के पांच इंजीनियरों समेत एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। यह पूरी कार्रवाई साल 2022 में बिजनौर जिले में हुए ‘ऊपरी गंगा नहर आधुनिकीकरण’ परियोजना में किए गए भारी भ्रष्टाचार के मामले में की गई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे सरकारी प्रोजेक्ट में कुल 16.68 करोड़ रुपये के घोटाले और वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई है, जिसके बाद शासन के निर्देश पर यह सख्त कदम उठाया गया है।
विजिलेंस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, इस बड़े घोटाले में विभाग के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर (SE) कौशल कुमार और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) संजय कुमार के नाम शामिल हैं, जिन पर सीधे मुकदमा लिखा गया है। इनके अलावा यशवंत सिंह, मनोज अग्रवाल और सुखबीर सिंह पर भी विजिलेंस ने केस दर्ज किया है। जांच में यह साफ हुआ है कि इन सभी इंजीनियरों ने पद का दुरुपयोग करते हुए ठेकेदार राजबीर से मिलीभगत की थी। इंजीनियरों और ठेकेदार की इसी साठगांठ के चलते सरकारी बजट की भारी लूट खसोट की गई और आधुनिकीकरण के काम में बड़े पैमाने पर धांधली को अंजाम दिया गया।
इस मामले में विजिलेंस की जांच टीम ने सभी संबंधित दस्तावेजों और तकनीकी रिपोर्टों को खंगालने के बाद ही मुकदमों की कार्रवाई को आगे बढ़ाया है। बिजनौर में साल 2022 के दौरान हुए इस निर्माण कार्य में घटिया सामग्री और कागजी हेरफेर के जरिए करोड़ों रुपये ठिकाने लगाए गए थे। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद विजिलेंस विभाग इन सभी नामजद अभियंताओं और ठेकेदार के खिलाफ अपनी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई को और तेज करने की तैयारी में है।