रुद्रपुर। घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में रुद्रपुर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए पीड़िता के पक्ष में एकपक्षीय फैसला सुनाया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/तृतीय अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) नीरज कुमार की अदालत ने ससुराल पक्ष को पीड़िता का पूरा स्त्रीधन 30 दिन के भीतर वापस करने के आदेश दिए हैं। वहीं पति को पीड़िता को दो लाख रुपये की एकमुश्त क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला पंतनगर थाना क्षेत्र के नगला गोलगेट निवासी एक महिला से जुड़ा है। पीड़िता के अनुसार, उसका निकाह 21 नवंबर 2021 को पीलीभीत निवासी मोहम्मद अफजल के साथ मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार हुआ था। महिला का आरोप है कि विवाह के दौरान मायके पक्ष ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-दहेज, सोने-चांदी के आभूषण और पांच लाख रुपये नकद दिए थे।
पीड़िता ने न्यायालय में आरोप लगाया कि शादी के कुछ समय बाद पति समेत ससुराल पक्ष के लोग कम दहेज लाने का ताना देकर उसे प्रताड़ित करने लगे और मायके से 10 लाख रुपये नकद तथा कार लाने का दबाव बनाया गया। मांग पूरी न होने पर उसके साथ कथित रूप से मारपीट और मानसिक उत्पीड़न किया गया।
महिला के मुताबिक, मुंबई में रहने के दौरान उसे पति के अपनी बिजनेस पार्टनर के साथ कथित संबंधों की जानकारी हुई। इसका विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया। 18 अगस्त 2022 को बेटी के जन्म के बाद उत्पीड़न और बढ़ने का आरोप है। पीड़िता का कहना है कि उसका स्त्रीधन लेकर उसे बच्ची समेत घर से निकाल दिया गया और बाद में बहाने से बुलाकर उसकी गोद से बच्ची भी ले ली गई।
अधिवक्ता राहुल काण्डपाल के माध्यम से पीड़िता ने घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत न्यायालय में वाद दायर किया। मामले में विपक्षी पक्ष के न्यायालय में उपस्थित नहीं होने और साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करने पर अदालत ने एकपक्षीय कार्रवाई की।
अदालत ने ससुराल पक्ष को भविष्य में किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा नहीं करने का आदेश दिया। साथ ही सोने-चांदी के आभूषण, घरेलू सामान, फर्नीचर, मोबाइल, कपड़े और दो लाख रुपये नकद समेत पूरा स्त्रीधन 30 दिन के भीतर वापस करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा अदालत ने पति को पीड़िता को 30 दिन के भीतर दो लाख रुपये की एकमुश्त क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। वहीं, पारिवारिक न्यायालय पहले ही पीड़िता के लिए 25 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण निर्धारित कर चुका है।