पीलीभीत। जनपद की पौराणिक पहचान और उद्गम स्थल मां गोमती नदी को ग्रीष्मकाल में सूखने से बचाने और उसे पुनर्जीवित करने के लिए जिला प्रशासन और वन विभाग ने एक बड़ी पहल शुरू की है। गोमती नदी, जो एक भूगर्भीय नदी है, वर्तमान में जलस्तर की भारी कमी का सामना कर रही है क्योंकि इसके उद्गम स्रोत अत्यंत धीमी गति से कार्य कर रहे हैं। इस समस्या के समाधान हेतु जिला गंगा समिति के सदस्यों, योगेश्वर सिंह और निर्भय सिंह के प्रस्ताव पर प्रभागीय निदेशक (D.F.O.) भरत कुमार डी.के. और जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने शासन को पत्र लिखकर नदी में 20 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की मांग की है।
​प्रशासनिक प्रस्ताव के अनुसार, माधोटांडा प्रणाली के अंतर्गत संचालित सिंचाई विभाग की देवीपुर माइनर के विस्तारीकरण के माध्यम से गोमती नदी को आवश्यक जल उपलब्ध कराया जा सकता है। जिलाधिकारी ने प्रमुख सचिव (सिंचाई) और राज्य स्वच्छ गंगा मिशन को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया है कि पूरनपुर विकास खंड के माधोटांडा स्थित गोमती उद्गम एक अत्यंत महत्वपूर्ण पौराणिक स्थल है, जहाँ प्रतिदिन सुबह-शाम आरती होती है और भारी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। नदी के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए मुख्य अभियंता शारदा सागर खंड, बरेली को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।
​इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों सहित अधिशासी अभियंता को निर्देशित किया है कि वे विभागीय स्तर पर समन्वय स्थापित कर नियमानुसार कार्य सुनिश्चित करें। यदि शासन से इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है, तो देवीपुर माइनर से मिलने वाले 20 क्यूसेक पानी से गोमती नदी न केवल ग्रीष्मकाल में सूखी होने से बचेगी, बल्कि इसकी अविरल धारा क्षेत्र की पारिस्थितिकी और धार्मिक आस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।
जिला गंगा समिति के सदस्य निर्भय सिंह एवं योगेश्वर सिंह ने इस संबंध में विधिवत एक पत्र लिखकर जिला गंगा समिति की बैठक में गोमती के लिए पानी आपूर्ति की मांग की थी

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