विधि संवाददाता, ​पीलीभीत। घर में घुसकर महिला के साथ दुष्कर्म करने और उसकी वीडियो बनाकर धमकी देने के गंभीर मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली का बारीकी से अवलोकन करने के बाद आरोपी की जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अदालत ने मामले की वर्तमान स्थिति और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।
​अभियोजन पक्ष के अनुसार, थाना घंघचाई क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि बीती 13 मई 2026 को जब वह अपने घर में अकेली थी, तभी गाँव का ही निवासी छत्रपाल पुत्र राजाराम जबरन उसके घर में घुस आया। आरोपी ने महिला की बेबसी का फायदा उठाते हुए उसके साथ दुष्कर्म किया और इस घिनौनी करतूत की एक वीडियो भी बना ली। पीड़िता का आरोप है कि बाद में आरोपी छत्रपाल अपने साथी राजेश, सत्यवीर, उमेश और कामता को साथ लेकर दोबारा उसके घर धमकाने पहुँचा। इन सभी ने पीड़िता को मुंह खोलने या कहीं भी शिकायत करने पर जान से मारने की सीधी धमकी दी।
​पीड़िता की तहरीर पर तत्परता से कार्रवाई करते हुए घंघचाई पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जेल में बंद आरोपी की ओर से जिला अदालत में जमानत अर्जी दाखिल कर उसे झूठा फंसाए जाने का दावा किया गया और रिहा करने की मांग की गई। हालांकि, शासकीय अधिवक्ता (अभियोजन) ने इसका कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि मामले की विवेचना अभी प्रगति पर है। यदि ऐसे समय में आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह बाहर आकर महत्वपूर्ण साक्ष्यों और गवाहों को डरा-धमकाकर प्रभावित कर सकता है। अदालत ने अभियोजन के तर्कों को सही मानते हुए आरोपी छत्रपाल की जमानत याचिका नामंजूर कर दी।

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