बीसलपुर (पीलीभीत)। बीसलपुर तहसील परिसर शुक्रवार को उस वक्त रणक्षेत्र बन गया, जब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मतदाता सूची से नाम काटे जाने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। आक्रोशित भीड़ ने तहसील परिसर में प्रदर्शन करते हुए एसडीएम नागेंद्र पांडेय की गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
यह प्रदर्शन सपा महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय सचिव दिव्या गंगवार के नेतृत्व में हुआ, जो करीब एक घंटे तक चला। बाद में एसडीएम द्वारा समस्या समाधान और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने पर मामला शांत हो पाया।
पहले स्कूल पहुंचे, फिर तहसील कार्यालय पर उमड़ा जनसैलाब
शुक्रवार दोपहर मुस्लिम समुदाय के दर्जनों लोग दिव्या गंगवार के साथ पहले परिषदीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय पहुंचे, जहां उन्हें एसडीएम नहीं मिले। इसके बाद भीड़ सीधे तहसील कार्यालय पहुंच गई।
इसी दौरान एसडीएम नागेंद्र पांडेय पीलीभीत कलेक्ट्रेट में एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने जा रहे थे। लोगों ने अपनी समस्या बताने की कोशिश की, लेकिन एसडीएम ने कहा कि वे जरूरी कार्य से जा रहे हैं और लौटकर शिकायत सुनेंगे।
एसडीएम के जवाब से भड़की भीड़, गाड़ी घेरकर किया विरोध
एसडीएम का यह जवाब सुनते ही भीड़ का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते लोगों ने एसडीएम की गाड़ी को घेर लिया और तहसील परिसर में जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ती देख एसडीएम को खुद गाड़ी से उतरकर लोगों के बीच आना पड़ा।
एसडीएम ने दिया सख्त आश्वासन: गलत वोट कटे तो जुड़ेगा, दोषी बीएलओ पर FIR होगी
एसडीएम नागेंद्र पांडेय ने लोगों की शिकायत गंभीरता से सुनते हुए कहा कि—अगर किसी का वोट गलती से काटा गया है, तो उसे तत्काल सही कराया जाएगा। वोट गलत तरीके से काटने वाले बीएलओ (Booth Level Officer) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसके बाद भीड़ शांत हुई और गाड़ी का घेराव खत्म कर दिया।
पुलिस पहुंची, तब तक खत्म हो चुका था प्रदर्शन
घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक भीड़ शांत होकर लौट चुकी थी। यह पूरा घटनाक्रम तहसील परिसर और स्कूल क्षेत्र में करीब एक घंटे तक चला।
मतदाता सूची पर उठे सवाल, पारदर्शिता की मांग तेज
स्थानीय लोगों ने मतदाता सूची में गड़बड़ी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता जरूरी है, और किसी भी नागरिक का वोट बिना ठोस कारण काटना लोकतंत्र पर सीधा हमला है।
प्रशासन के आश्वासन से लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन जनता ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और मतदाता सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।