पीलीभीत। सारस भारत का सबसे ऊंचा उड़ने वाला पक्षी और उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी है। अपनी लंबी गर्दन, लाल सिर, धूसर शरीर और जीवनभर के लिए जोड़ी बनाने की प्रवृत्ति के कारण सारस ग्रामीण परिदृश्य और आर्द्रभूमियों की एक विशिष्ट पहचान है। पीलीभीत की धरती लंबे समय से सारस के लिए अनुकूल आवास रही है और यहां नजीरगंज, पसगवां, नरकुण्ड, सिमरा, दियूरी, ललौरीखेड़ा, बड़ा नाला, गजरौला, दियूरिया और घुंगचियाई जैसे क्षेत्रों में इसकी उपस्थिति दर्ज की जाती रही है। हालांकि, वर्तमान समय में सारस की संख्या और उसके समूहों में लगातार कमी महसूस की जा रही है, जिसके पीछे नदियों और प्राकृतिक आर्द्रभूमियों का सिकुड़ना तथा उनके किनारों पर बढ़ता अवैध कब्जा मुख्य कारण है।
नदियां और जल स्रोत हैं सारस का जीवन-आधार
माला, खन्नौत, जुकना, चूका, देवहा, उल्ल और गोमती जैसी नदियां तथा उनसे जुड़े छोटे-बड़े जल क्षेत्र पीलीभीत की प्राकृतिक जल-व्यवस्था का मुख्य आधार हैं। जब नदी और नाले अपने प्राकृतिक स्वरूप में रहते हैं, तो उनके आसपास उथले जल क्षेत्र, घासभूमि और छोटे जलाशय बनते हैं, जो सारस के भोजन और प्रजनन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। जलमार्गों का प्राकृतिक फैलाव कम होने, प्रवाह बाधित होने या किनारों पर स्थायी कब्जे होने से सारस के लिए सुरक्षित आवास लगातार सीमित होते जा रहे हैं।
पर्यावरणीय संकेतक के रूप में सारस की घटती संख्या, संरक्षण योजना की मांग
सारस की संख्या में कमी केवल एक पक्षी के घटने का संकेत नहीं है, बल्कि यह पूरे जल-परिदृश्य में हो रहे नकारात्मक बदलाव की चेतावनी है। सारस को एक पर्यावरणीय संकेतक माना जाता है, क्योंकि जहां स्वच्छ जल, प्राकृतिक आर्द्रभूमि और खुले कृषि क्षेत्र सुरक्षित होते हैं, वहीं इसके लिए बेहतर परिस्थितियां बनी रहती हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए टरक्वाइज वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष अख्तर मियां खान ने पीलीभीत के हॉटस्पॉट को चिन्हित कर एक दीर्घकालिक ‘सारस एवं आर्द्रभूमि संरक्षण योजना’ तैयार करने पर जोर दिया है।
सारस और आर्द्रभूमि संरक्षण को लेकर वन विभाग गंभीर: प्रभागीय वनाधिकारी
मामले में प्रभागीय निदेशक भरत कुमार डीके ने बताया कि पीलीभीत में सारस और उनकी प्राकृतिक शरणस्थलियों का संरक्षण वन विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। विभाग द्वारा जिले में मौजूद प्रमुख जलभूमियों और सारस के हॉटस्पॉट क्षेत्रों का नियमित रूप से अनुश्रवण किया जा रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि नदियों व तालाबों के किनारे अवैध अतिक्रमण को हटाने तथा स्थानीय ग्रामीणों व प्रकृति प्रेमियों के सहयोग से जन-जागरूकता अभियान चलाकर राजकीय पक्षी के सुरक्षित आवास और प्रजनन स्थलों को हर हाल में सुरक्षित बनाया जाएगा।