-डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री-
​पीलीभीत। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा टाइगर रिजर्व के संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरने वाले मार्गों पर रात्रि कालीन परिवहन प्रतिबंधित करने के आदेश ने पीलीभीत में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास में मानवीय हस्तक्षेप कम करने के उद्देश्य से जारी इस आदेश के जमीनी स्तर पर लागू होते ही स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का आक्रोश फूट पड़ा है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) प्रशासन जहां इसे न्यायिक आदेश की अनिवार्य अनुपालना बता रहा है, वहीं स्थानीय जनता इसे अपनी जीवनशैली और आजीविका पर बड़ा प्रहार मान रही है।
​इस प्रतिबंध के विरोध में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। आम आदमी पार्टी और भारतीय किसान यूनियन (चढ़नी) ने जिलाधिकारी को विधिवत ज्ञापन सौंपकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठनों का तर्क है कि पीलीभीत और पूरनपुर जैसे क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि रात्रि मार्ग बंद होने से आपातकालीन सेवाओं और कृषि परिवहन पर बुरा असर पड़ेगा। विशेष रूप से पूरनपुर उपनगर में इस आदेश का व्यापक असर देखा जा रहा है, जहाँ व्यापारियों और आम नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर अपना विरोध जारी रखा है। उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने भी चिंता जताई है कि इस प्रतिबंध से जिले की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों को भारी नुकसान होगा।
​बढ़ते जन-दबाव और विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस मामले में हस्तक्षेप किया है। जिलाधिकारी ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों की एक आपात बैठक बुलाई है, ताकि न्यायिक आदेश के पालन और जनता की सहूलियत के बीच कोई मध्यम मार्ग तलाशा जा सके। दूसरी ओर, टाइगर रिजर्व प्रशासन का रुख स्पष्ट है; उनका कहना है कि वे केवल शीर्ष अदालत के निर्देशों का अक्षरशः पालन कर रहे हैं, जिसमें किसी भी प्रकार की कोताही की गुंजाइश नहीं है।
​महत्वपूर्ण बात यह है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित एक विशेष समिति जल्द ही दुधवा और पीलीभीत टाइगर रिजर्व का दौरा करने वाली है। यह समिति मौके पर जाकर आदेश के पालन की स्थिति और जमीनी चुनौतियों का अवलोकन करेगी। समिति की इस रिपोर्ट पर ही भविष्य की दिशा तय होगी, लेकिन फिलहाल पीलीभीत में संरक्षण की नीतियों और जन-अधिकारों के बीच एक बड़ा गतिरोध बना हुआ है।

सुझाव
पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) में बढ़ते विरोध और प्रशासनिक हलचल को देखते हुए, आगामी दिनों में प्रशासनिक रुख और टाइगर रिजर्व के नियमों के बीच निम्नलिखित बिंदुओं पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं:
​1. प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले संभावित कदम
​जन दबाव और सर्वोच्च न्यायालय की समिति के दौरे को देखते हुए जिलाधिकारी और टाइगर रिजर्व प्रशासन इन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।
​कॉन्वॉय सिस्टम उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व की तर्ज पर, पीलीभीत में भी रात के समय वाहनों को अकेले जाने के बजाय एक साथ समूहों (कॉन्वॉय) में वन विभाग की निगरानी में निकालने पर विचार किया जा सकता है।
​समय सीमा में ढील की समीक्षा: पूरी रात मार्ग बंद रखने के बजाय, पीक अवर्स (जैसे देर रात 12 से भोर 4 बजे तक) को चिन्हित कर बाकी समय नियंत्रित यातायात की अनुमति मांगी जा सकती है।
​आपातकालीन पास सेवा: बीमारों, एम्बुलेंस और आवश्यक सेवाओं के लिए विशेष ‘ग्रीन कॉरिडोर’ या तुरंत पास जारी करने की व्यवस्था लागू की जा सकती है ताकि पूरनपुर जैसे उपनगरों का संपर्क न टूटे।
​वैकल्पिक मार्गों का सुदृढ़ीकरण: यदि मुख्य मार्ग बंद होते हैं, तो टाइगर रिजर्व के बाहर से गुजरने वाले लिंक रोड्स को तत्काल गड्ढा मुक्त और चौड़ा करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा सकता है।
​2. टाइगर रिजर्व के वर्तमान कड़े नियम और चुनौतियाँ
​वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख के अनुसार, टाइगर रिजर्व के भीतर यातायात के कुछ मानक नियम हैं जो इस विवाद की जड़ हैं:
​ध्वनि और प्रकाश प्रदूषण पर रोक: रात में वाहनों की हेडलाइट और शोर वन्यजीवों (विशेषकर बाघ और हाथियों) के प्राकृतिक व्यवहार और शिकार के समय को बाधित करते हैं।
​रोड किल की घटनाएं: पीलीभीत और दुधवा के मार्गों पर पूर्व में कई बार तेज रफ्तार वाहनों से दुर्लभ वन्यजीवों की मृत्यु हुई है, जिसे रोकने के लिए न्यायालय बेहद सख्त है।
​स्पीड लिमिट: वर्तमान में भी रिजर्व के अंदर 20-30 किमी/घंटा की गति सीमा निर्धारित है, जिसे अब सेंसर आधारित कैमरों से मॉनिटर करने की योजना है।
​समिति का निरीक्षण: सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति यह देखेगी कि क्या मार्ग पर ‘अंडरपास’ या ‘इको-ब्रिज’ बनाए जा सकते हैं। यदि समिति ने इनके निर्माण की सिफारिश की, तो भविष्य में यातायात और वन्यजीव दोनों सुरक्षित रह सकेंगे।
​3. आगामी स्थिति का विश्लेषण
​सर्वोच्च न्यायालय की समिति का दौरा निर्णायक होगा। यदि समिति स्थानीय जनता की समस्याओं (व्यापार और आपातकालीन आवाजाही) को अपनी रिपोर्ट में शामिल करती है, तो नियमों में कुछ लचीलापन आ सकता है। अन्यथा, टाइगर रिजर्व प्रशासन को केंद्र सरकार के ‘ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर’ गाइडलाइंस के तहत सड़कों को पूरी तरह से वन क्षेत्र से बाहर करने या उन्हें एलिवेटेड (ऊपर से गुजरने वाली सड़क) बनाने की दिशा में काम करना होगा।

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