पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में शनिवार को आपदा मोचक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य वनकर्मियों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने, बचाव कार्य करने और जरूरत के समय त्वरित राहत उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षित करना रहा।

कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम वनकर्मियों के लिए बेहद उपयोगी हैं। इनके माध्यम से उन्हें आपदा के दौरान अपनाई जाने वाली बचाव तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास करने का अवसर मिलता है।

कार्यक्रम में एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट नरेश नामदेव ने आपातकालीन परिस्थितियों में बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों और बचाव के तरीकों की जानकारी दी। वन्य एवं वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय निदेशक भारत कुमार डीके तथा उप प्रभागीय वनाधिकारी रमेश चौहान की मौजूदगी में दोनों वन प्रभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी की।

रेबीज और कुत्ते के काटने पर सावधानी की जानकारी

कार्यशाला में गोरखपुर प्राणी उद्यान के चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने रेबीज और कुत्ते के काटने से बचाव को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रेबीज संक्रमित जानवर की लार के संपर्क से फैल सकता है और स्तनधारी जीवों के काटने या खरोंच की स्थिति में समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कुत्ते, बंदर, घोड़े, गाय, खरगोश और चूहे जैसे स्तनधारी जीवों के काटने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेने और चिकित्सक की सलाह के अनुसार रेबीज रोधी टीका लगवाने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि गंभीर घाव या चेहरे पर चोट की स्थिति में तत्काल प्राथमिक उपचार और चिकित्सा सहायता जरूरी है।

डॉ. सिंह ने पालतू जानवरों के नियमित टीकाकरण को भी आवश्यक बताया।

सर्पदंश में समय पर अस्पताल पहुंचाना जरूरी

वाइल्डलाइफ सर्वाइवल अलायंस के कंट्री हेड डॉ. शैलेन्द्र सिंह ने सर्पदंश के प्रबंधन और सांपों की विभिन्न प्रजातियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत में सांपों की 300 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें कुछ विषैले और कई गैर-विषैले होते हैं।

उन्होंने कोबरा, करैत और वाइपर को प्रमुख विषैले सांपों में शामिल बताया, जबकि धामन जैसे सांपों को गैर-विषैला बताया। उन्होंने सर्पदंश के संभावित लक्षणों और ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल चिकित्सा सहायता लेने की जरूरत समझाई।

डॉ. शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि सर्पदंश की स्थिति में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाकर चिकित्सकीय निगरानी में उचित उपचार और जरूरत पड़ने पर एंटी-वेनम दिया जाना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

कार्यशाला के माध्यम से वनकर्मियों को आपदा, वन्यजीवों से जुड़े जोखिम, रेबीज और सर्पदंश जैसी परिस्थितियों में सुरक्षित तरीके से प्रतिक्रिया देने के लिए आवश्यक जानकारी और सावधानियों से अवगत कराया गया।

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