पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को करारी हार मिलने के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ कहा है कि वह इस्तीफा नहीं देंगी और उन्होंने चुनाव नतीजों को “जनादेश नहीं, साजिश” बताया है।
कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता ने कहा, “मैं हारी नहीं हूं, मैं इस्तीफा क्यों दूं?” उन्होंने मतगणना प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया कि कई सीटों पर जनादेश “लूट” लिया गया।
राज्यपाल के पास क्या विकल्प?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं। अगर कोई मुख्यमंत्री बहुमत खोने के बावजूद इस्तीफा नहीं देता, तो राज्यपाल के पास दो प्रमुख विकल्प होते हैं—
- मुख्यमंत्री को पद से बर्खास्त करना
- या विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए विशेष सत्र बुलाना
मौजूदा स्थिति में, चुनावी आंकड़ों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला है, जबकि टीएमसी काफी पीछे है। ऐसे में सदन में बहुमत साबित करना ममता सरकार के लिए मुश्किल माना जा रहा है।
चुनाव आयोग पर भी आरोप
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उनकी पार्टी की लड़ाई बीजेपी से ज्यादा आयोग से थी। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
साथ ही, उन्होंने चुनाव के बाद की स्थिति की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति बनाने का ऐलान भी किया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल में संवैधानिक और राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। अब नजरें राज्यपाल के अगले कदम पर टिकी हैं, जो इस सियासी गतिरोध को खत्म करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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