पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और अपराधियों पर नकेल कसने की दिशा में आज एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। राज्य विधानसभा द्वारा इस वर्ष जून 2026 में पारित किए गए दो नए ऐतिहासिक अपराध-रोधी कानून आज से पूरे पश्चिम बंगाल में आधिकारिक रूप से प्रभावी हो गए हैं। इस संबंध में राज्य के माननीय राज्यपाल ने विधेयकों को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। राजभवन से हरी झंडी मिलने के बाद अब राज्य प्रशासन और पुलिस को उपद्रवियों व अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए असाधारण और बेहद मजबूत कानूनी शक्तियां मिल गई हैं।
आज से लागू हुए पहले कानून ‘पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक-2026’ में बेहद कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके अंतर्गत जन सुरक्षा को खतरे में डालने, दंगों की स्थिति पैदा करने और शांति व्यवस्था को जानबूझकर भंग करने वाली असामाजिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट अधिकतम 12 महीने (एक साल) तक हिरासत में रखा जा सकता है। सरकार का मानना है कि इस कानून के प्रभावी होने से संगठित अपराध और असामाजिक तत्वों के हौसले पस्त होंगे। हालांकि, इन विधेयकों के पारित होने से पहले सदन में भारी राजनीतिक घमासान भी देखने को मिला था, जहाँ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अलग हुए गुट ने कुछ महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तुत किए थे, लेकिन सत्ता पक्ष ने उन पर विचार नहीं किया और विधेयकों को मूल रूप में ही पारित किया गया था।
इसके साथ ही, राज्य में ‘पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था रखरखाव (संशोधन) विधेयक 2026’ को भी लागू कर दिया गया है, जिसके माध्यम से मूल पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था रखरखाव अधिनियम 1972 में बड़ा बदलाव किया गया है। इस नए संशोधन कानून का मुख्य उद्देश्य किसी भी विरोध प्रदर्शन, हड़ताल या दंगे के दौरान होने वाली आगजनी, तोड़फोड़ और सार्वजनिक तथा निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्तियों पर भारी मुआवजे का भुगतान अनिवार्य करना है। अब से संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले हुड़दंगियों की पहचान कर उनसे ही पूरी क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी।
इन दोनों नए राज्य कानूनों के तहत आने वाले सभी अपराधों को देश के नए कानूनों यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 के कानूनी दायरे के अंतर्गत लाया गया है, जिससे अदालती कार्रवाई में तेजी आ सके। विधानसभा में चर्चा के दौरान अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अधिनियम बनने के बाद इन दोनों कानूनों को राज्य में असामाजिक गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती से लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि यह कानून बंगाल में सुरक्षा का एक नया अध्याय शुरू करेगा।