पीलीभीत। जनपद में एक आठ वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ हुई दुष्कर्म की जघन्य घटना को लेकर सामाजिक संगठनों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस अमानवीय कृत्य के विरोध में और पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय दिलाने के लिए राष्ट्रीय हनुमान दल के पदाधिकारियों ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संगठन ने जनपद न्यायालय पीलीभीत के तीनों प्रमुख बार एसोसिएशनों—जिला संयुक्त बार एसोसिएशन, जिला सेंट्रल बार एसोसिएशन और जिला सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्षों को एक लिखित ज्ञापन सौंपकर इस मामले में सहयोग की मांग की है।
सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि १७ जून २०२६ को घटित हुई यह घटना अत्यंत अमानवीय है, जिसने संपूर्ण समाज को झकझोर कर रख दिया है। इस कृत्य से जनपद के आम नागरिकों के साथ-साथ अधिवक्ता समुदाय में भी भारी गुस्सा है। राष्ट्रीय हनुमान दल ने बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सम्मानित अधिवक्ताओं से सामूहिक रूप से विनम्र आग्रह किया है कि समाज और मानवता के हित को ध्यान में रखते हुए कोई भी अधिवक्ता इस जघन्य अपराध के आरोपी को बचाने के लिए उसकी पैरवी या कोर्ट में उसका बचाव न करे।
संगठन ने बार एसोसिएशनों से अपील की है कि वे अभियोजन पक्ष की ओर से कड़ी पैरवी करने में अपना पूरा सहयोग प्रदान करें, ताकि कानूनी प्रक्रिया को गति मिले और दोषी को त्वरित रूप से कठोरतम दंड दिलाया जा सके। पदाधिकारियों का कहना है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए बार एसोसिएशनों का आगे आना बेहद जरूरी है, क्योंकि पूरा समाज और देश इस समय न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। उन्हें पूरा विश्वास है कि पीलीभीत के तीनों बार एसोसिएशन मानवता के पक्ष में खड़े होकर इस मांग का समर्थन करेंगे।
इस दौरान ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से जिला संरक्षक स्वतंत्र देवल, जगदीश सक्सेना, हरिपाल यादव, जिला अध्यक्ष अमित गुप्ता ‘अधिवक्ता’, रामानुज अवस्थी और आदित्य ओझा सहित संगठन के कई अन्य पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे।