​पीलीभीत। नगर पालिका परिषद पीलीभीत द्वारा सिविल लाइंस नॉर्थ (नकटदाना चौराहा) स्थित दुकानों को खाली करने के लिए दिए गए तीन दिन के अल्टीमेटम के खिलाफ प्रभावित व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। गुरुवार को युवा व्यापार मंडल के अध्यक्ष शैली शर्मा के नेतृत्व में व्यापारी अपनी पीड़ा लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुँचे. अधिशासी अधिकारी द्वारा बलपूर्वक बेदखल करने और दुकान खाली कराने के आदेश को नियम-कानून के विरुद्ध बताते हुए पीड़ितों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। व्यापारियों का कहना है कि वे पिछले 27 वर्षों से वैध किरायेदार हैं और बिना उचित समय व लिखित समझौते के उन्हें हटाना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।


​सार्वजनिक नीलामी से हुआ था भू-खंडों का आवंटन
​जिलाधिकारी को सौंपे गए पत्र के अनुसार, नगर पालिका परिषद पीलीभीत द्वारा 16 सितंबर 1999 को सिविल लाइंस नॉर्थ, नकटदाना चौराहा स्थित भू-खंडों के आवंटन के लिए सार्वजनिक नीलामी आयोजित की गई थी। इस नीलामी में अधिकतम बोली लगाने वाले अलग-अलग आवेदकों को भू-खंड आवंटित किए गए थे। आवंटन के बाद सभी सफल बोलीदाताओं ने निर्धारित नीलामी राशि जमा की और नगर पालिका द्वारा तय मासिक किराये पर इन संपत्तियों का कब्जा लिया। इसके बाद आवंटियों ने उक्त भू-खंडों पर अपने निजी खर्च से दुकानों और भवनों का निर्माण कराया और तब से लगातार वहां अपना व्यवसाय चला रहे हैं। व्यापारियों का दावा है कि वे नियमानुसार लगातार नगर पालिका को मासिक किराया भी जमा करते आ रहे हैं, जिसके प्रमाण स्वरूप उन्होंने पूर्व आवंटन पत्र एवं किरायेनामे की रसीदों की छायाप्रतियां भी प्रशासन को सौंपी हैं।


​आजीविका का संकट और विधिक सुरक्षा की मांग
​व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि वे शहर के विकास कार्य या नए शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के निर्माण के विरोधी नहीं हैं, बल्कि वे अपनी आजीविका की विधिक सुरक्षा चाहते हैं। उक्त दुकानों में होने वाले कारोबार के अलावा उनके पास आय का कोई अन्य साधन नहीं है, ऐसे में महज तीन दिन में दशकों पुराने जमे-जमाए कारोबार को उजाड़ने से उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। पीड़ितों ने मांग की है कि अधिशासी अधिकारी की इस एकतरफा और बलपूर्वक की जा रही कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए और व्यापारियों के हितों को सुरक्षित करने के बाद ही आगे की कोई योजना बनाई जाए।


​न्यायहित में व्यापारियों ने प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख शर्तें और विधिक मांगें रखी हैं:
​पंजीकृत विधिक समझौता: प्रस्तावित नए शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य शुरू करने से पहले नगर पालिका प्रशासन प्रत्येक वर्तमान किरायेदार के साथ एक नियम-शर्तों का लिखित अनुबंध पत्र तैयार करे और उसे बाकायदा पंजीकृत कराए।
​6 महीने की समय-सीमा: तीन दिन के नोटिस को वापस लेते हुए व्यापारियों को अपनी दुकानें अस्थाई रूप से खाली करने के लिए कम से कम 6 महीने की निश्चित समय अवधि दी जाए, ताकि वे अपने माल और व्यवसाय को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर सकें।
​आवंटन की लिखित गारंटी: पंजीकृत अनुबंध पत्र में यह स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए कि नवनिर्माण संपन्न होने के बाद प्रत्येक पुराने किरायेदार को नए परिसर में बतौर किरायेदार प्राथमिकता के आधार पर दुकान आवंटित की जाएगी।
​निर्माण काल में वैकल्पिक व्यवस्था: जब तक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य चलेगा, तब तक की अवधि के लिए व्यापारियों को किसी अन्य स्थान पर अस्थाई तौर पर अपना कारोबार संचालित करने की वैधानिक अनुमति प्रदान की जाए।


​12 पीड़ित दुकानदारों ने सामूहिक रूप से उठाई आवाज
​दुकानदारों ने अपने अधिकारों की रक्षा और पुराने समझौतों को बहाल रखने के लिए प्रशासन के समक्ष एक सामूहिक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है। इस आवेदन में कुल 12 दुकानदारों के नाम उनके पिता/पति के नाम, दुकान संख्या और मोबाइल नंबर सहित शामिल हैं। सूची के अनुसार, ताहिर हुसैन पुत्र विलायत हुसैन (दुकान नं. 0-193), नसीम हुसैन पुत्र विलायत हुसैन (दुकान नं. 0-194), डाॅ. मो. अफसर पुत्र मो. यूसुफ (दुकान नं. 0-195) और शैलेन्द्र सिंह पुत्र महेश लाल (दुकान नं. 0-198) ने अपनी दावेदारी पेश की है।
​इनके साथ ही बाजार संघ के अन्य दुकानदारों में जाहिद हुसैन पुत्र बुन्दन (दुकान नं. 0-199 व 0-200), मो. असलम रजा पुत्र मो. सलीम (दुकान नं. 0-201), कमाल हसन खां पुत्र सरफराज हसन खां (दुकान नं. 0-203), मो. अकरम पुत्र मो. सलीम (दुकान नं. 0-204), यूनुस पुत्र इमामउद्दीन (दुकान नं. 0-212), मो. तसलीम पुत्र श्री मो. सलीम (दुकान नं. 0-213) तथा आशकारा बेगम पत्नी मो. शाहिद (दुकान नं. 0-214) ने भी इस पत्र पर अपने हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लगाकर अपनी मांग रखी है। सभी प्रार्थीगणों ने प्रशासन से इस गंभीर और संवेदनशील मामले पर न्यायसंगत व त्वरित कार्रवाई करने की अपील की है। अब देखना यह है कि इस पर जिलाधिकारी पीलीभीत द्वारा क्या निर्देश जारी किए जाते हैं।

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