फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के औंग थाना क्षेत्र से शादी की रस्मों के बीच दहेज की मांग और उसके बाद उपजे विवाद का एक बेहद विचित्र मामला सामने आया है। यहाँ एक विवाह समारोह में धूमधाम से अगुवानी और जयमाला का कार्यक्रम संपन्न हुआ। लेकिन इसके बाद अचानक दूल्हा पक्ष द्वारा दहेज में लग्जरी कार की डिमांड कर दी गई। दूल्हे की इस मांग से नाराज होकर दुल्हन ने भी चढ़ावे में सोने-चांदी के जेवरात कम लाने की बात कहते हुए शादी करने से साफ इन्कार कर दिया। इसके बाद शादी की खुशियां पल भर में हंगामे में बदल गईं।
रात भर चली पंचायत, जमानत के तौर पर रखवाई दूल्हे की कार
दुल्हन द्वारा शादी से मना किए जाने के बाद रात से लेकर सुबह तक गांव के संभ्रांतजनों और ग्राम प्रधान की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच मैराथन पंचायत और समझौता वार्ता चली। स्थानीय ग्राम प्रधान ने बताया कि काफी मान-मनौव्वल के बाद दोनों पक्षों में एक लिखित समझौता तय हुआ। समझौते के मुताबिक वर पक्ष द्वारा शादी में लिए गए 6 लाख 50 हजार रुपये नकद 30 जून तक और शादी की सजावट आदि में खर्च हुए 1 लाख 25 हजार रुपये 30 जुलाई तक कन्या पक्ष को वापस करने पर सहमति बनी। इस भुगतान की गारंटी के तौर पर वर पक्ष के जेवरात से भरा बक्सा और दूल्हे की कार को कन्या पक्ष के घर पर ही जमानत के रूप में रखवा लिया गया, जबकि कार की चाबी वर पक्ष को दे दी गई। इसके बाद सुबह बारात बिना दुल्हन के ही बैरंग वापस लौट गई। [1]
थाने पहुंचकर दूल्हा पक्ष ने रची झूठी कहानी, पुलिस ने किया बेनकाब
घर लौटने के बाद वर पक्ष के लोगों ने पंचायत में हुए लिखित समझौते को सिरे से नकार दिया और सीधे औंग थाने पहुंच गए। उन्होंने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि कन्या पक्ष ने उनके जेवर और कार जबरन अपने पास रख लिए हैं। इतना ही नहीं, दूल्हा पक्ष ने दुल्हन के पिता पर उल्टे 6 लाख 50 हजार रुपये छीनने का भी संगीन आरोप मढ़ दिया।
थाना प्रभारी की जांच में खुली पोल, मिली सख्त हिदायत
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए औंग थाना प्रभारी ने तुरंत एक पुलिस टीम को तफ्तीश के लिए गांव भेजा। पुलिस टीम ने जब गांव पहुंचकर ग्राम प्रधान और चश्मदीदों से पूरे घटनाक्रम की हकीकत जानी, तो दूल्हा पक्ष के सारे आरोप पूरी तरह झूठे और मनगढ़ंत पाए गए। इसके बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए दूल्हे और उसके परिजनों को थाने में ही सख्त हिदायत (चेतावनी) दी। पुलिस ने साफ कहा कि पंचायत में जो भी समझौता तय हुआ है, उसका पूरी ईमानदारी से पालन करें, अन्यथा पुलिस को इस धोखाधड़ी और झूठी शिकायत के मामले में कड़ी कानूनी व वैधानिक कार्रवाई करने के लिए विवश होना पड़ेगा।