पीलीभीत। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के दिशा-निर्देशन में जिला क्षय रोग केंद्र द्वारा सोमवार को जिला जेल में चार दिवसीय टीबी स्क्रीनिंग कैंप का विधिपूर्वक शुभारंभ किया गया। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत बंदियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने और जेल को पूरी तरह टीबी मुक्त बनाने के संकल्प के साथ इस विशेष शिविर का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के पहले ही दिन जिला क्षय रोग क्लिनिक के चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय गुप्ता ने जिला कारागार पहुंचकर शिविर का सघन निरीक्षण (इन्स्पेक्शन) किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। शिविर के दौरान आधुनिक पोर्टेबल एक्स-रे मशीन के माध्यम से कैदियों की सघन जांच की गई, जिसमें जेल अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. नरेश चंद्र ने बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनकी विस्तृत काउंसलिंग की।
शिविर के दौरान जिला क्षय रोग केंद्र के सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर राजेश कुमार गंगवार और सीनियर लैब सुपरवाइजर शेर सिंह चौहान ने कैदियों को टीबी के लक्षण, उससे बचाव के उपाय तथा सरकार द्वारा दिए जाने वाले मुफ्त इलाज व सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बंदियों को जागरूक करते हुए बताया कि बैरक जैसे घने वातावरण में संक्रमण से बचने के लिए खांसते या छींकते समय मुंह पर कपड़ा जरूर रखें और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर तुरंत जेल प्रशासन को सूचित कर बलगम की जांच करवाएं। इसके साथ ही अधिकारियों ने सरकार की ओर से टीबी मरीजों को पोषण भत्ते के रूप में सीधे बैंक खाते में भेजे जाने वाले ₹1000 के आर्थिक लाभ के बारे में भी विस्तार से समझाया।
अभियान के पहले दिन जिला क्षय रोग केंद्र की टीम ने पूरी मुस्तैदी से काम किया, जिसमें सीनियर सुपरवाइजर राजेश कुमार गंगवार, सीनियर लैब सुपरवाइजर शेर सिंह चौहान और एक्स-रे टेक्नीशियन आरती वर्मा सक्रिय रहे। टीम द्वारा जेल में बंद कुल 90 कैदियों का मौके पर ही डिजिटल एक्स-रे किया गया। डिजिटल एक्स-रे जांच के दौरान जो भी कैदी संदिग्ध पाए गए, उनके बलगम (स्पुटम) के नमूने तत्काल फाल्कन ट्यूब में एकत्र किए गए। पहले दिन कुल 42 संदिग्ध कैदियों के बलगम के सैंपल लिए गए हैं, जिन्हें सटीक व उन्नत जांच के लिए जिला क्षय रोग केंद्र भेजा गया है। चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय गुप्ता ने बताया कि यह विशेष स्क्रीनिंग कैंप अगले तीन दिनों तक जेल में निरंतर जारी रहेगा, ताकि कारागार के शत-प्रतिशत कैदियों की जांच सुनिश्चित कर उन्हें संक्रमण से सुरक्षित किया जा सके।