पीलीभीत। केंद्र और प्रदेश की ‘डबल इंजन’ सरकार ने इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित कर किसानों को राहत देने का दावा किया है, लेकिन जनपद पीलीभीत के जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। यहां का छोटा और मध्यम वर्गीय किसान सरकारी आंकड़ों की चमक से दूर, बाजार की लाचारी और बिचौलियों के शोषण का शिकार हो रहा है।
जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों से मिल रही खबरों के मुताबिक, विशेषकर 10 बीघा से कम जोत वाले छोटे किसान अपनी खून-पसीने की फसल को औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं। जहां सरकारी केंद्रों पर 2585 रुपये का भाव मिलना चाहिए, वहीं खुले बाजार में निजी व्यापारी और बिचौलिए छोटे किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर मात्र 2000 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदारी कर रहे हैं। किसान आर्थिक तंगी और अगली फसल की तैयारी के दबाव में अपनी उपज इन व्यापारियों के हवाले कर रहे हैं, जो भारी मात्रा में गेहूं का भंडारण करने में जुटे हैं।
छोटे किसानों के सरकारी केंद्रों तक न पहुंच पाने के पीछे कई तकनीकी और व्यवहारिक कारण हैं। जनपद में सरकारी क्रय केंद्रों की संख्या ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। दूर-दराज के गांवों से केंद्र तक फसल ले जाने का भारी भाड़ा, समय की बर्बादी और पंजीकरण व तौल की लंबी प्रक्रिया छोटे किसानों के लिए बड़ी रुकावट साबित हो रही है। इसके विपरीत, रसूखदार बड़े किसान और बिचौलिए अपनी उपज आसानी से सरकारी केंद्रों पर खपाकर एमएसपी का पूरा लाभ उठा रहे हैं, जिससे आर्थिक असमानता की खाई और गहरी होती जा रही है।
प्रशासनिक मौन पर उठते सवाल
हैरानी की बात यह है कि खुलेआम हो रहे इस शोषण और अवैध भंडारण के बावजूद स्थानीय प्रशासन मौन साधे हुए है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि शासन-प्रशासन वाकई छोटे किसानों का हित चाहता है, तो गांव-गांव में छोटे क्रय केंद्र खोले जाने चाहिए और तौल की प्रक्रिया को सरल बनाना चाहिए।
जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेकर उन व्यापारियों पर नकेल कसेगा जो एमएसपी से नीचे फसल खरीद रहे हैं? क्या निम्न तबके के किसानों को उनका वाजिब हक दिलाने के लिए विशेष टीमों का गठन किया जाएगा, या फिर अन्नदाता का यह शोषण “सरकारी आंकड़ों” की आड़ में यूं ही जारी रहेगा?
किसानों की मांग: “हमें कागजी वादे नहीं, गांव के नजदीक पारदर्शी खरीद व्यवस्था चाहिए ताकि बिचौलियों के चंगुल से बचा जा सके।”
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