वॉशिंगटन/तेहरान। वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए आज एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता के पूरी तरह विफल होने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है। जवाबी कार्रवाई के रूप में अमेरिका ने समुद्री रास्ते से ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण नाकेबंदी (Naval Blockade) शुरू कर दी है, जिससे मध्य-पूर्व (Middle East) में युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है। 

कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल
अमेरिका की इस सैन्य घेराबंदी का सीधा और भयावह असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा है। ईरानी बंदरगाहों से तेल की सप्लाई पूरी तरह रुकने की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मच गया है। पिछले कुछ घंटों के भीतर ही कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम 103 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो तेल की कीमतें 120 डॉलर तक भी जा सकती हैं। 

वैश्विक सप्लाई चेन के लिए खतरे की घंटी
ईरान के रास्ते होने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति रुकने से भारत सहित दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ने वाला है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नाकेबंदी न केवल ऊर्जा संकट पैदा करेगी, बल्कि इससे दुनिया भर में महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है। फिलहाल, अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के आसपास के क्षेत्रों में भारी सुरक्षा तनाव पैदा कर दिया है। 


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