पीलीभीत। पीलीभीत पुलिस द्वारा अपराधों की रोकथाम एवं अपराधियों की गिरफ्तारी हेतु चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत थाना बिलसंडा पुलिस को एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। क्षेत्राधिकारी बीसलपुर के पर्यवेक्षण तथा थानाध्यक्ष बिलसण्डा के कुशल नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने बीमारी के इलाज का झांसा देकर घर में रखी ज्वैलरी चोरी करने वाले गिरोह के एक वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार अभियुक्त के पास से चोरी किए गए सोने के आभूषण बरामद किए गए हैं।
प्राप्त विवरण के अनुसार, थाना बिलसण्डा क्षेत्र के ग्राम शीतलपुर मरौरी निवासी सुखविंदर सिंह पुत्र कुंदन सिंह के घर से इलाज का झांसा देकर आभूषण चोरी किए जाने का मामला सामने आया था। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मु०अ०सं० 164/2026, धारा 305 बीएनएस के तहत नामजद आरोपी अलीकुर्रहमान (निवासी ग्राम रायपुर बिचपुरी) तथा दो अन्य अज्ञात अभियुक्तों के विरुद्ध मामला पंजीकृत किया था। मामले में नामजद अभियुक्त अलीकुर्रहमान को पुलिस द्वारा पूर्व में ही दिनांक 02 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
विवेचना के दौरान प्रकाश में आए दूसरे अभियुक्त इमरान पुत्र मौलाई (निवासी ग्राम गोरा, थाना सेहरामऊ उत्तरी, जनपद पीलीभीत) की पुलिस को तलाश थी। दिनांक 05 सितंबर 2026 को मुखबिर खास की सटीक सूचना पर थाना बिलसंडा पुलिस टीम के उप-निरीक्षक श्री सन्नी आर्य एवं हेड कांस्टेबल हरेन्द्र कुमार ने ग्राम पहाड़गंज तिराहे के पास से वांछित अभियुक्त इमरान को गिरफ्तार कर लिया। अभियुक्त के कब्जे से चोरी की गई पीली धातु के 02 कान के कुंडल तथा 01 अंगूठी बरामद हुई। बरामदगी के आधार पर मुकदमे में धारा 317(2) बीएनएस की वृद्धि करते हुए अभियुक्त को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर जेल भेज दिया गया है।
शातिर ठगी और अपराध कारित करने का अनोखा तरीका:
पुलिस पूछताछ में अभियुक्तों द्वारा अपराध कारित करने के तरीके का खुलासा हुआ। यह गिरोह देशी जड़ी-बूटियों से इलाज करने के नाम पर पीलीभीत तथा आसपास के जनपदों में घूम-घूमकर ऐसे परिवारों को चिन्हित करता था, जिनके घर में कोई व्यक्ति काफी समय से बीमार चल रहा हो। आरोपियों द्वारा बीमारी ठीक करने का भरोसा दिलाकर घर में रखे सोने-चांदी के जेवरातों को इलाज की प्रक्रिया में प्रयोग करने के नाम पर हासिल कर लिया जाता था। जेवरात को पानी व जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर परिजनों को विश्वास दिलाया जाता था कि इस पानी को पीने से मरीज ठीक हो जाएगा। इसके बाद परिवार के सदस्यों को अन्य कामों में व्यस्त कर मौका पाते ही आरोपी सारा आभूषण चोरी कर फरार हो जाते थे।