हमीरपुर। उत्तर प्रदेश में आसमान से बरसती आग और रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी के बीच हमीरपुर जिले के विद्युत विभाग से एक बेहद अनोखी और दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। अत्यधिक तपन और बढ़ते लोड के कारण पावर ट्रांसफार्मरों को ओवरहीट (गर्म) होकर फुंकने और ट्रिपिंग की समस्या से बचाने के लिए बिजली विभाग ने अनोखा रास्ता निकाला है। जिले के सभी प्रमुख विद्युत उपकेंद्रों (बिजली घरों) में बड़े-बड़े कूलर लगाए गए हैं, जो चौबीसों घंटे ट्रांसफार्मरों को ठंडी हवा देकर कूल रख रहे हैं। विभाग की इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य भीषण गर्मी में जनता को बिना किसी रुकावट के निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

इंसानों की तरह अब ट्रांसफार्मर भी खा रहे कूलर की हवा

मई के इस महीने में पारा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह त्रस्त है। इस भीषण तपन का सीधा असर बिजली विभाग के उपकरणों पर भी देखने को मिल रहा है। लगातार बढ़ते पावर लोड और बाहरी उच्च तापमान के कारण बिजली घरों में स्थापित भारी-भरकम पावर ट्रांसफार्मर अत्यधिक गर्म हो जाते हैं, जिससे उनके फुंकने या अचानक ट्रिप होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इस तकनीकी चुनौती से निपटने के लिए हमीरपुर बिजली विभाग ने इंसानों की तरह ही ट्रांसफार्मरों के ठीक सामने बड़े-बड़े वाटर कूलर तैनात कर दिए हैं, जो लगातार पानी की बौछार और ठंडी हवा फेंककर मशीनरी के तापमान को नियंत्रित रख रहे हैं।

जिले के 21 प्रमुख बिजली घरों में मुस्तैद किए गए कूलर्स

उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के स्थानीय अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह प्रयोग जिले के किसी एक सब-स्टेशन तक सीमित नहीं है। हमीरपुर जिले के अंतर्गत आने वाले कुल 21 मुख्य बिजली घरों (विद्युत केंद्रों) में यह कूलिंग व्यवस्था लागू कर दी गई है। जिन सब-स्टेशनों पर लोड सबसे ज्यादा है और जहां से बड़े रिहायशी इलाकों को बिजली सप्लाई की जाती है, वहां के पावर ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से बड़े क्षमता वाले व्यवसायिक कूलरों का इंतजाम किया गया है।

ट्रिपिंग और अघोषित बिजली कटौती से मिलेगी बड़ी राहत

अक्सर देखा जाता है कि गर्मियों के मौसम में ट्रांसफार्मर गर्म होने पर सुरक्षा कारणों से सिस्टम ऑटो-ट्रिप हो जाता है, जिससे कई-कई घंटों तक पूरे इलाके की बत्ती गुल हो जाती है। अधिकारियों का दावा है कि ट्रांसफार्मरों के सामने कूलर लगाने की इस पहल के बाद से मशीनों का तापमान सामान्य बना हुआ है। इससे न केवल उपकरणों की उम्र बढ़ेगी, बल्कि लो-वोल्टेज, बार-बार होने वाले फॉल्ट और अघोषित बिजली कटौती की समस्या से भी स्थानीय जनता को बड़ी राहत मिल रही है। सोशल मीडिया पर बिजली घरों में चल रहे इन कूलरों का वीडियो और तस्वीरें अब तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसे लोग विभाग का एक बेहतरीन ‘सकारात्मक जुगाड़’ बता रहे हैं।

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