अमेठी: उत्तर प्रदेश में जीरो टॉलरेंस और भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावों के बीच अमेठी से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ देश की सुरक्षा में तैनात एक CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) का जवान पिछले 7 वर्षों से अपनी ही पुश्तैनी जमीन को बचाने और न्याय पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। आरोप है कि स्थानीय पुलिस दबंगों का साथ दे रही है और पीड़ित परिवार को ही प्रताड़ित किया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मामला अमेठी जिले के जामों थाना क्षेत्र के नदियांवा गांव का है। पीड़ित जवान का आरोप है कि उसके परिवार के ही कुछ रसूखदार लोगों ने उसकी कीमती जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। जवान का कहना है कि वह पिछले सात सालों से जिले के आला अधिकारियों से लेकर थाने तक न्याय की गुहार लगा चुका है, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
जामों पुलिस पर गंभीर आरोप
जवान ने स्थानीय जामों पुलिस की कार्यप्रणाली पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। पीड़ित के अनुसार, पुलिस ने दूसरे पक्ष पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा उसके ही परिजनों को थाने ले जाकर रातभर अवैध हिरासत में रखा। जवान का आरोप है कि पुलिस के इस रवैये से भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और उसका परिवार दहशत के साये में जीने को मजबूर है।
देश का जवान, पर सिस्टम ने किया बेहाल
वर्दी पहनकर देश की सुरक्षा करने वाला यह जवान आज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। जवान ने भावुक होते हुए कहा, “अगर एक सैनिक को अपनी जमीन बचाने के लिए 7 साल तक भटकना पड़े और उसके परिवार को पुलिस प्रताड़ना झेलनी पड़े, तो आम जनता का क्या होगा?”
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
नदियांवा गांव के इस मामले ने एक बार फिर राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस के समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि अमेठी के उच्च अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर जवान को न्याय दिलाते हैं या फिर ‘न्याय की गुहार’ फाइलों में ही दबी रह जाएगी।
