कर्मचारी का दर्जा और सम्मानजनक मानदेय की मांग, दो बड़े संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर किया जोरदार प्रदर्शन
रुद्रपुर। विभिन्न मांगों को लेकर गुरुवार को आशा फैसिलिटेटर एवं कार्यकर्ता संगठन और उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के बैनर तले आशा कार्यकर्ताओं ने अलग अलग प्रदर्शन कर जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकार को ज्ञापन भेजे। दोनों संगठनों ने आशाओं और आशा फैसिलिटेटरों को कर्मचारी का दर्जा,सम्मानजनक मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
आशा फैसिलिटेटर एवं कार्यकर्ता संगठन (भारतीय मजदूर संघ संबद्ध) की जिला अध्यक्ष सरोज यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कहा कि वर्ष 2005 से आशा फैसिलिटेटर स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत निरंतर सेवाएं दे रही हैं। वर्तमान में प्रदेश की 12,315 आशाओं का मार्गदर्शन 606 आशा फैसिलिटेटर कर रही हैं।मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य,टीका करण,स्वास्थ्य जागरूकता तथा सरकारी योजनाओं को जनसामान्य तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है लेकिन उन्हें अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। संगठन ने आशा फैसिलिटेटरों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने,गर्मी एवं सर्दी की वर्दी उपलब्ध कराने,राज्य कर्मचारियों की भांति अवकाश सुविधा देने,पल्स पोलियो ड्यूटी का मानदेय 100 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 600 रुपये करने, पहाड़ी क्षेत्रों में कार्य के लिए यात्रा भत्ता उपलब्ध कराने तथा अन्य सेवा सुविधाएं लागू करने की मांग की।
वहीं उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन(ऐक्टू) की जिला अध्यक्ष ममता पान्नू के नेतृत्व में आशाओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए कहा आशा कार्यकर्ताओं पर स्वास्थ्य विभाग के लगभग सभी कार्यक्रमों और सर्वेक्षणों का दायित्व है लेकिन उन्हें न न्यूनतम वेतन मिलता है न कर्मचारी का दर्जा और न ही पेंशन की सुविधा।उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न योजनाओं का प्रोत्साहन राशि और अन्य भुगतान कई कई माह तक लंबित रहता है जिससे आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाला भुगतान भी यात्रा व्यय के लिए पर्याप्त नहीं है। यूनियन ने वर्ष 2021 में आशाओं का मासिक मानदेय 11,500 रुपये किए जाने संबंधी प्रस्ताव और मुख्यमंत्री द्वारा किए गए आश्वासन को लागू करने की मांग दोहराई इसके साथ ही आशाओं को न्यूनतम वेतन,स्थायी कर्मचारी का दर्जा,सेवानिवृत्ति पर अनिवार्य पेंशन,पेंशन व्यवस्था लागू होने तक 10 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता,प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन 500 रुपये भुगतान,विभिन्न मदों का भुगतान प्रत्येक माह समय पर करने,सभी सरकारी अस्पतालों में आशा घर बनाने, विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पद भरने तथा अस्पतालों में आशाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई।
दोनों संगठनों ने कहा कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं और सरकार को उनके योगदान के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।उन्होंने चेतावनी दी यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार को प्रेषित किए गए।विरोध प्रदर्शन में सुनीता,लक्ष्मी कोठारी,दीपा कन्याल,अनुपमा,सीता,मधुबाला,बसंती,लक्ष्मी गौड़, पलविंदर,आशा देवी,शशि गुप्ता,बिंदू सागर,सुधा पाठक सहित अन्य महिलाएं मौजूद रहीं।