मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में बहुचर्चित ललिता हत्याकांड और उसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज के मामले में पुलिस प्रशासन ने एक बेहद बड़ी और दंडात्मक कार्रवाई की है। ललिता हत्याकांड के मुख्य आरोपी अंकुश के सगे भाई और पीएसी (PAC) में तैनात कांस्टेबल अंकित चौधरी को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है। आरोपी कांस्टेबल पर अपनी खाकी वर्दी का दुरुपयोग करते हुए जेल में बंद अपने हत्यारोपी भाई अंकुर की अवैध रूप से मदद करने और जांच को प्रभावित करने का बेहद गंभीर आरोप है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीआईजी कलानिधि नैथानी ने खुद पीएसी मुरादाबाद के उच्चाधिकारियों से वार्ता की, जिसके बाद कांस्टेबल अंकित चौधरी की भूमिका की विभागीय और कानूनी जांच कड़े स्तर पर शुरू कर दी गई है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए डीआईजी कलानिधि नैथानी ने मुकदमे के तमाम डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच का जिम्मा सीधे एसपी सिटी (SP City) मेरठ को सौंप दिया है। गौरतलब है कि इस कांस्टेबल के खिलाफ निलंबन और सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर बीती 8 जुलाई 2026 को दलित संगठनों और पीड़ित परिवार द्वारा कलेक्ट्रेट पर उग्र प्रदर्शन किया गया था, जहाँ स्थिति अनियंत्रित होने पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। लाठीचार्ज के बाद जब इस पूरे मामले ने राजनीतिक और सामाजिक रूप से तूल पकड़ लिया, तब शासन के निर्देश पर पीड़ित परिवार की मुख्य मांगों पर त्वरित एक्शन लिया गया है। ज्ञात हो कि इस जघन्य हत्याकांड में मृतका ललिता को उसके कथित प्रेमी ने पहले अगवा (किडनैप) किया था और बाद में बेरहमी से उसकी हत्या कर शव को साक्ष्य मिटाने की नीयत से पूरी तरह जला दिया था।