सितारगंज/टनकपुर। भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और सीमा नियमों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई गई है। 57वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB), सितारगंज के कमांडेंट श्री गंगा सिंह उदावत के कुशल निर्देशन में सीमा चौकी सैलानिगोठ के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत एक वृहद अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित संवेदनशील “नो-मैन्स लैंड” (दशगजा क्षेत्र) में पूर्व से चिन्हित किए गए 81.9 वर्ग मीटर क्षेत्र के अस्थाई अवैध अतिक्रमण को पूरी तरह से हटवा दिया गया है। इस बड़ी संयुक्त कार्रवाई के बाद सीमावर्ती इलाकों के उपद्रवियों और अवैध कब्जा करने वालों में हड़कंप मच गया है।

इस बड़े और संवेदनशील सीमा सुरक्षा ऑपरेशन को सफ़ल बनाने के लिए एसएसबी, राजस्व विभाग और वन विभाग की एक संयुक्त हाई-लेवल टीम का गठन किया गया था। इस संयुक्त टीम में टनकपुर की तहसीलदार श्रीमती पिंकी आर्या व अन्य राजस्व कर्मचारी, वन विभाग टनकपुर की SDO श्रीमती शालनी जोशी, रेंजर सुश्री मेधा सिंह व अन्य वन कर्मचारी मुख्य रूप से शामिल रहे। वहीं एसएसबी की तरफ से 57वीं वाहिनी के उप-कमांडेंट श्री अनिल कुमार यादव तथा सहायक कमांडेंट श्री जसोबंता सेनापति सहित भारी संख्या में सशस्त्र बल मुस्तैद रहे। टीम ने भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा स्तंभ (पिलर) संख्या-808/1 से लेकर स्तंभ संख्या-809 के मध्य भारतीय क्षेत्र में किए गए इस अवैध अतिक्रमण को शांतिपूर्ण ढंग से ढहा दिया।

प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, जिला प्रशासन के विशेष अनुरोध पर इस कार्रवाई के दौरान थपलियालखेड़ा गाँव के स्थानीय ग्रामीणों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अतिक्रमण हटाते समय पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से आवश्यक सहयोग प्रदान किया। अतिक्रमण को पूरी तरह जमींदोज करने के बाद मौके पर उपस्थित एसएसबी अधिकारियों और प्रशासनिक टीम ने सीमावर्ती ग्रामीणों के साथ एक विशेष बैठक की। इस दौरान ग्रामीणों को भविष्य में “नो-मैन्स लैंड” तथा अंतर्राष्ट्रीय सीमा की गरिमा व संवेदनशीलता को बनाए रखने के प्रति गंभीर रूप से जागरूक किया गया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी है कि वे भविष्य में इस प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी प्रकार का नया निर्माण, कृषि कार्य अथवा अवैध कब्जा बिल्कुल न करें, अन्यथा उनके खिलाफ सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा नियमों के उल्लंघन के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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