​पीलीभीत। केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गांधी स्टेडियम प्रेक्षागृह में उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय जनपद स्तरीय मिलेट्स और प्राकृतिक खेती कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश शासन के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान राज्यमंत्री व जनपद के प्रभारी मंत्री बलदेव सिंह औलख की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और लगभग 650 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान कृषि, गन्ना, उद्यान, रेशम, पशुपालन और मत्स्य विभाग द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टालों के जरिए नई तकनीकों और प्रजातियों का प्रदर्शन किया गया, जिसका मुख्य अतिथि सहित अन्य गणमान्य लोगों ने बारीकी से अवलोकन किया। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री ने लाभार्थियों को पुष्टाहार का वितरण भी किया।


​कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने किसानों से अधिक से अधिक मिलेट्स (मोटे अनाज) की खेती और प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया ताकि समाज को विभिन्न प्रकार की गंभीर बीमारियों से बचाया जा सके। कार्यक्रम में उपस्थित बीसलपुर विधायक विवेक वर्मा ने भी कृषकों से अपील की कि वे अपने और अपने बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाएं। वहीं बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्तानन्द ने गो-आधारित प्राकृतिक खेती पर विशेष बल देते हुए कहा कि प्रत्येक किसान को गाय पालन करना चाहिए, जिससे दूध के साथ-साथ प्राप्त होने वाले गोमूत्र और गोबर का खेती में उपयोग कर अपनी आय दोगुनी की जा सके। इस दौरान पूर्व बरखेड़ा विधायक किशनलाल राजपूत और भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य भी मौजूद रहे।


​जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने किसानों से समन्वित कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश को वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए पहले हमें विकसित उत्तर प्रदेश का निर्माण करना होगा। उन्होंने किसानों से मुर्गी पालन क्षेत्र में आगे आने की अपेक्षा की ताकि अंडे का उत्पादन बढ़ाया जा सके और बाहर से अंडे मंगाने की निर्भरता खत्म हो। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी सतीश कुमार मिश्रा ने भी विभागीय योजनाओं की प्रगति साझा की।


​तकनीकी सत्र में उप कृषि निदेशक राममिलन सिंह परिहार ने ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, सांवा, कुटकी, काकून और चीना जैसे मिलेट्स के पोषक तत्वों, उनके उपभोग और उन्नतशील खेती के तरीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि महिलाओं में खून और कैल्शियम की कमी को श्रीअन्न के दैनिक उपयोग से दूर किया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र टांडाविजैसी के वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. ढाका ने बताया कि श्रीअन्न की फसलों को बहुत ही कम खाद, उर्वरक और सिंचाई की आवश्यकता होती है, और यह खेती मुख्यतः वर्षा जल के सहारे आसानी से हो जाती है। कार्यशाला में जिला विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह, वैज्ञानिक डॉ. दीपक कुमार, नाबार्ड के डीडीएम चंद्रप्रकाश त्रिवेदी और उद्यान निरीक्षक आर.डी. गंगवार सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *