​पीलीभीत। विश्व आपातकालीन चिकित्सा दिवस के अवसर पर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं सम्बद्ध चिकित्सालय, पीलीभीत ने गंभीर एवं जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दृढ़ता से प्रदर्शित किया है। संस्थान की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा के मार्गदर्शन में अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) को अत्याधुनिक आपातकालीन प्रबंधन प्रणाली से लैस किया गया है, जहाँ गंभीर चिकित्सीय संकट की स्थिति में मरीजों को बिना किसी देरी के त्वरित और सटीक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। मीडिया प्रभारी डॉ. अरुण सिंह ने बताया कि गंभीर चिकित्सा देखभाल में समय की बचत ही रोगी के जीवन की रक्षा कर सकती है, इसी उद्देश्य से आईसीयू को तकनीकी रूप से पूरी तरह सक्रिय और उन्नत बनाया गया है ताकि मानवीय त्रुटियों की संभावना को शून्य किया जा सके।
​संस्थान ने आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए पुनर्जीवन एवं श्वास मार्ग प्रबंधन की उच्च स्तरीय व्यवस्था लागू की है। आईसीयू में आवश्यक पुनर्जीवन औषधियों और उन्नत जीवनरक्षक उपकरणों से सुसज्जित आपातकालीन ट्रॉलियाँ तथा कठिन परिस्थितियों में तत्काल श्वास मार्ग सुरक्षित करने के लिए विशेष श्वासनली नलिकाएं और उन्नत स्वरयंत्र दर्शी उपकरण (लैरिंगोस्कोप) सदैव तैयार अवस्था में रखे जाते हैं। इसके साथ ही, हृदय गति के घातक विकारों के तुरंत उपचार के लिए आधुनिक डीफिब्रिलेटर (विद्युत आघात यंत्र) का प्रतिदिन परीक्षण कर उन्हें मुस्तैद रखा जाता है। अचानक होने वाली श्वसन विफलता से निपटने के लिए वेंटिलेटरों को रोगी परिपथ और आवश्यक छनित्रों (फिल्टर्स) के साथ पूर्व-संयोजित रखा गया है, ताकि बिना किसी विलंब के यांत्रिक श्वसन सहायता दी जा सके। बैकअप के तौर पर पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर और हाथ से संचालित श्वसन बैग भी रणनीतिक स्थानों पर उपलब्ध हैं।
​गंभीर रोगियों के उपचार में पारंपरिक और समय लेने वाली प्रयोगशाला जाँच प्रक्रिया के स्थान पर आईसीयू में ‘पॉइंट ऑफ केयर’ यानी शैय्या के समीप त्वरित नैदानिक जाँच प्रणाली लागू की गई है। इसके अंतर्गत बिस्तर पर ही तात्कालिक अल्ट्रासोनोग्राफी सुविधा के माध्यम से हृदय, फेफड़ों व रक्त परिसंचरण का मूल्यांकन किया जाता है, तथा धमनीय रक्त गैस (एबीजी) विश्लेषण यंत्र के जरिए कुछ ही मिनटों में चयापचयी और इलेक्ट्रोलाइट संबंधी महत्वपूर्ण रिपोर्ट प्राप्त हो जाती है। आईसीयू प्रभारी डॉ. अरविंद एम ने कहा कि श्वास मार्ग सुरक्षित करने अथवा गंभीर शॉक को नियंत्रित करने में बचाया गया प्रत्येक क्षण सीधे तौर पर मृत्यु दर को कम करता है। प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा और मीडिया प्रभारी डॉ. अरुण सिंह ने संयुक्त रूप से आश्वस्त किया कि पीलीभीत मेडिकल कॉलेज का यह सुदृढ़ और मानकीकृत ढांचा जटिल आपातकालीन स्थितियों से निपटने में पूर्णतः सक्षम है, जिससे अब स्थानीय मरीजों को उच्च स्तरीय इलाज के लिए महानगरों की ओर भागने की आवश्यकता नहीं होगी।

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