विधि संवाददाता,पीलीभीत। बैंक से धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ट्रैक्टर लोन निकालने के करीब दो दशक पुराने मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुंदर पाल ने साक्ष्यों के अभाव में बैंक मैनेजर और फील्ड ऑफिसर सहित चारों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। आरोपियों की ओर से अधिकृत अधिवक्ता शरद जायसवाल ने प्रभावी पैरवी की।
मामला वर्ष 2005 का है। अभियोजन कथानक के अनुसार, ग्राम जादौपुर निवासी जसमेर सिंह के नाबालिग पुत्र सुखबाज सिंह ने न्यायालय के आदेश पर थाना गजरौला में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि मोहल्ला सरायखाम निवासी मंजीत सिंह और नखासा निवासी चरन सिंह ने बैंक ऑफ बड़ौदा, शाखा कैच के तत्कालीन प्रबंधक प्रह्लाद सिंह तौलिया व फील्ड ऑफिसर के.पी. सिंह के साथ सांठगांठ की। आरोप के मुताबिक, आरोपियों ने सुखबाज सिंह की भूमि को मंजीत सिंह की बताकर फर्जी खतौनी तैयार की और 1 सितंबर 2005 को बैंक से तीन लाख रुपये का ट्रैक्टर लोन निकाल लिया। पीड़ित द्वारा पुलिस प्रशासन से शिकायत के बाद, मामला अंततः न्यायालय पहुँचा था।
पुलिस ने विवेचना के बाद मंजीत सिंह और चरन सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। बाद में न्यायालय ने सुनवाई के दौरान बैंक मैनेजर प्रह्लाद सिंह और फील्ड ऑफिसर के.पी. सिंह को भी अभियुक्त के रूप में तलब किया। लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कई गवाह पेश किए गए, वहीं आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए दलीलें दीं। अंततः, न्यायालय ने दोनों पक्षों की जिरह सुनने और पत्रावली का बारीकी से अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपियों के विरुद्ध दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। इसी के आधार पर अदालत ने चारों आरोपियों को बाइज्जत बरी करने का आदेश जारी किया।
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