विधि संवाददाता, पीलीभीत। दहेज के लोभी पति और ससुराली जनों के खिलाफ एक विवाहिता द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) मंगलदेव सिंह ने सुनगढ़ी पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने पुलिस को निर्देशित किया है कि मामले की जांच कर सात दिनों के भीतर आख्या (रिपोर्ट) अदालत में प्रस्तुत की जाए।
कम दहेज के लिए प्रताड़ना और मायके वालों से मारपीट
मूल रूप से शाहजहांपुर जनपद के थाना आरसी मिशन क्षेत्र के मोहल्ला दलेलगंज की रहने वाली अंजलि कुमारी पुत्री श्रीराम (हाल निवासी ग्राम चिड़ियादाह, थाना सुनगढ़ी, पीलीभीत) ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दंड प्रक्रिया संहिता के तहत प्रार्थना पत्र दिया था। अंजलि ने बताया कि उसका विवाह 23 नवंबर 2023 को दलेलगंज निवासी चंदन कश्यप पुत्र हरिद्वारी कश्यप के साथ हुआ था। शादी में उसके परिवार ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार भरपूर दहेज दिया था, लेकिन ससुराल के लोग इस दान-दहेज से संतुष्ट नहीं थे।
कम दहेज का ताना देकर पति चंदन, सास, जेठ , जेठानी, देवर और ननद उसे लगातार शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे। जब प्रताड़ना और मारपीट की घटनाएं हद से ज्यादा बढ़ गईं, तो पीड़िता ने अपने मायके वालों को ससुराल बुलाया। मायके पक्ष के लोगों ने जब ससुराल वालों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने अंजलि और उसके परिजनों के साथ भी बर्बरता से मारपीट की और उन्हें घर से खदेड़ दिया। तब से पीड़िता अपने मायके में रहने को मजबूर है।
घर में घुसकर हमला और 8 महीने के बच्चे को छीनने का प्रयास
न्यायालय को दिए शिकायती पत्र में पीड़िता ने एक और गंभीर घटना का उल्लेख किया। उसने बताया कि बीते 20 जून 2026 को उसका पति चंदन अपने पूरे परिवार के साथ उसके मायके (चिड़ियादाह) आ धमका। आरोपियों ने अंजलि से कहा कि उन्हें भनक लगी है कि उसने चंदन के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की है। इस पर जब अंजलि ने बताया कि उसने केवल अपने भरण-पोषण (खर्चे) का मुकदमा दर्ज कराया है, तो आरोपी आगबबूला हो गए।
सभी ससुराली जनों ने घर में घुसकर अंजलि के साथ दोबारा मारपीट की और उसके मात्र आठ महीने के मासूम बच्चे को जबरन छीनकर ले जाने की कोशिश करने लगे। चीख-पुकार सुनकर दौड़े आस-पड़ोस के लोगों ने किसी तरह बीच-बचाव कर अंजलि और उसके बच्चे की जान बचाई।
थाने और कप्तान से नहीं मिली राहत, तब मिली न्यायालय की शरण
पीड़िता का आरोप है कि इस दुस्साहसिक वारदात के बाद वह रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तत्काल थाना सुनगढ़ी गई, लेकिन स्थानीय पुलिस ने उसकी कोई सुनवाई नहीं की और मामला दर्ज करने से टालमटोल कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने डाक के माध्यम से पुलिस अधीक्षक (एसपी) पीलीभीत को भी शिकायती पत्र भेजा, मगर वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पुलिसिया रवैये से निराश होकर आखिरकार पीड़िता ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
मामले की गंभीरता और पीड़िता के तर्कों को सुनने के बाद, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंगलदेव सिंह ने सुनगढ़ी थाना प्रभारी को आरोपियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना शुरू करने और 7 दिन के भीतर विस्तृत आख्या न्यायालय के समक्ष पेश करने का कड़ा आदेश जारी किया है।