पुरी। ओडिशा के पुरी स्थित ऐतिहासिक व पवित्र श्री जगन्नाथ मंदिर में आज भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के बहुप्रतीक्षित ‘नव यौवन’ दर्शन आयोजित हो रहे हैं. ज्येष्ठ पूर्णिमा के शाही स्नान के बाद से पिछले एक पखवाड़े से चल रहे ‘अनसार’ (एकांतवास) काल के समाप्त होने के बाद, पवित्र त्रिमूर्ति का यह पहला आधिकारिक सार्वजनिक दर्शन है. सनातन मान्यताओं के अनुसार, स्नान पूर्णिमा के बाद अत्यधिक स्नान के कारण महाप्रभु बीमार हो गए थे, जिसके बाद आज अपनी इस ‘धार्मिक बीमारी’ से पूरी तरह ठीक होकर वे देश-विदेश से पुरी पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं के समक्ष अपने अत्यंत मनमोहक और नए युवा रूप में प्रकट हुए हैं.

इस भव्य और अलौकिक ‘नव यौवन’ दर्शन को शांतिपूर्ण व व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA), पुरी जिला प्रशासन और ओडिशा पुलिस ने कड़े सुरक्षा घेरे व विशेष यातायात व्यवस्था का खाका तैयार किया है. वीआईपी दर्शनार्थियों से लेकर आम भक्तों के लिए मंदिर के भीतर और सिंहद्वार के आसपास अलग-अलग बैरिकेडिंग जोन बनाए गए हैं ताकि किसी भी तरह की भगदड़ की स्थिति न बने. आज होने वाले इस विशेष दर्शन और अनुष्ठान के संपन्न होने के साथ ही आगामी रथ यात्रा से पूर्व किए जाने वाले सभी प्रमुख अनुष्ठानों और गुप्त रीति-रिवाजों का विधिवत समापन हो जाएगा.

इस ऐतिहासिक अनुष्ठान के तुरंत बाद पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्‍नाथ रथ यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो जाएगा. इस वर्ष की रथ यात्रा आगामी गुरुवार को पवित्र त्रिमूर्ति की श्री गुंडिचा मंदिर तक की औपचारिक और भव्य यात्रा के साथ मनाई जाएगी, जिसके लिए महाप्रभु के तीनों विशाल रथ ‘नंदीघोष’, ‘तालध्वज’ और ‘दर्पदलन’ बनकर पूरी तरह तैयार हो चुके हैं. मंदिर के मुख्य पुजारियों ने बताया कि नव यौवन दर्शन के बाद भगवान के विग्रहों को रथारूढ़ करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसे देखने के लिए पुरी में इस समय देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लाखों सनातन धर्मावलंबियों का आना लगातार जारी है.

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