रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में चालू सीजन के दौरान मॉनसून की कछुआ चाल के कारण कृषि और जल स्तर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी किए गए ताजा विधिक बुलेटिन के अनुसार, राज्य में वर्तमान समय तक सामान्य के मुकाबले पूरे 21 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जिससे मैदानी और पठारी इलाकों में सूखे जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों ने राहत की खबर देते हुए सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर और जशपुर जनपदों के लिए ‘येलो अलर्ट’ (Yellow Alert) जारी किया है और कल, 13 जुलाई से संपूर्ण प्रदेश में वर्षा जनित गतिविधियों में तीव्र वृद्धि होने की विधिक संभावना व्यक्त की है।
गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका, प्रशासन अलर्ट
प्राप्त प्रामाणिक और आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि आगामी २४ से ४८ घंटों के भीतर छत्तीसगढ़ के कई संवेदनशील और कछार क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तीव्र आकाशीय बिजली (लाइटनिंग) गिरने की विधिक आशंका बनी हुई है। इस प्राकृतिक खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासनों ने एडवाइजरी जारी की है। नागरिकों, चरवाहों और खेतों में काम करने वाले मजदूरों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि वे खराब मौसम और आंधी-तूफान के दौरान खुले मैदानों, बड़े पेड़ों और लोहे के बिजली के खंभों व टावरों से विधिक दूरी बनाए रखें ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके।
13 से 15 जुलाई के बीच अच्छी बारिश की उम्मीद, खरीफ फसलों की बुआई को मिलेगा संबल
रायपुर स्थित मौसम केंद्र के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि 13 जुलाई से लेकर 15 जुलाई 2026 के मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मध्यम से भारी दर्जे की मानसूनी वर्षा होने की पूरी संभावना है। यदि मौसम विभाग का यह विधिक पूर्वानुमान धरातल पर सटीक बैठता है, तो इससे राज्य के ग्रामीण अंचलों में कृषि कार्यों को एक नया जीवनदान मिलेगा। वर्तमान में पानी के अभाव में रुकी हुई खरीफ की मुख्य फसलों (जैसे धान, मक्का और दलहन) की बुआई और रोपाई का कार्य दोबारा युद्धस्तर पर प्रारंभ हो सकेगा, जिससे प्रदेश के लाखों किसानों को भारी आर्थिक मानसिक तनाव से एक बड़ी और व्यावहारिक राहत मिलना विधिक रूप से तय माना जा रहा है।