​पीलीभीत। जनपद की विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) गीता सिंह की अदालत ने संगठित अपराध के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाते हुए तीन शातिर अपराधियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, प्रत्येक दोषी पर दस-दस हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
​शातिर गिरोह बनाकर करते थे अपराध
अभियोजन कथानक के अनुसार, यह मामला वर्ष 2014 का है। 14 अगस्त 2014 को थाना माधोटांडा के तत्कालीन एसएचओ के.पी. सिंह ने सूचना दर्ज कराई थी कि ग्राम गुलाब टांडा के निवासी मय्यर शाह, उस्मान शाह और फुरकान शाह ने मिलकर एक संगठित आपराधिक गिरोह बना रखा है। इस गिरोह का सरगना उस्मान शाह था। यह गिरोह अपने भौतिक और आर्थिक लाभ के लिए अवैध रूप से धन अर्जित करने के उद्देश्य से अपराध करता था। इलाके में इनका इतना भय और आतंक था कि आम जनता का कोई भी व्यक्ति इनके विरुद्ध गवाही देने का साहस नहीं जुटा पाता था।
​न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाया निर्णय
मामले की विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी पूरनपुर धर्मपाल सिंह ने की थी, जिन्होंने गहन जांच के बाद आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल की। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अमित कुमार शुक्ल ने प्रभावी पैरवी की और न्यायालय के समक्ष महत्वपूर्ण गवाह पेश किए। हालांकि, आरोपियों ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए दलीलें पेश कीं, लेकिन न्यायालय ने पत्रावली का गहन अवलोकन करने और गवाहों के बयानों के आधार पर तीनों को दोषी पाया। विशेष न्यायाधीश गीता सिंह ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि समाज में भय व्याप्त करने वाले अपराधियों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।

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