सितारगंज। पारले बिस्किट प्राइवेट लिमिटेड के परिसर में राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) के तहत एक दिवसीय जागरूकता एवं संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें सिडकुल के 35 से अधिक औद्योगिक अधिष्ठानों के एचआर प्रमुखों और प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला में युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और उद्योगों को कुशल कार्यबल मुहैया कराने पर जोर दिया गया।
बृहस्पतिवार को कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण एवं शिक्षुता), कुमाऊं मंडल हल्द्वानी मयंक अग्रवाल, सिडकुल सितारगंज इंडस्ट्रियल वेलफेयर के अध्यक्ष दुर्गेश अग्रवाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
अतिथि मयंक अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना उद्योगों और युवाओं के बीच सेतु का काम करती है। इसके माध्यम से युवाओं को उद्योगों की वास्तविक कार्यप्रणाली और कार्य-संस्कृति के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलता है। इससे युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ती है और उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होता है। उन्होंने बताया कि अब एक अभ्यर्थी अधिकतम दो बार अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है। इसके लिए पहली अप्रेंटिसशिप पूरी करने के एक वर्ष बाद दूसरे व्यवसाय में प्रशिक्षण लिया जा सकता है। उन्होंने सरकार की ओर से स्टाइपेंड में लगभग 35 प्रतिशत वृद्धि किए जाने की जानकारी भी दी।
उन्होंने बताया कि अब उद्योग अपने अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं को देश में स्थित अपनी अन्य औद्योगिक इकाइयों के साथ विदेश में स्थित अपने प्रतिष्ठानों में भी प्रशिक्षण के लिए भेज सकेंगे। इस अवधि में प्रशिक्षुओं पर होने वाला पूरा खर्च संबंधित उद्योग को वहन करना होगा। संवाद
उत्तराखंड में 30 हजार से अधिक अप्रेंटिस नियोजित
सितारगंज। संयुक्त निदेशक मयंक अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश के 13 जिलों में सबसे अधिक अप्रेंटिस ऊधमसिंह नगर जिले में नियोजित हैं। वर्ष 2015-16 में जहां 84 उद्योगों में 800 से अधिक अप्रेंटिस कार्यरत थे, वहीं वर्ष 2026-27 में पोर्टल पर 2,277 उद्योग पंजीकृत हैं और इनमें 30 हजार से अधिक अप्रेंटिस नियोजित हैं।
इधर, अतिथि दुर्गेश अग्रवाल ने कहा कि अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण औद्योगिक विकास और युवाओं के कौशल संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने उद्योगों से अपने प्रतिष्ठानों में अधिक से अधिक अप्रेंटिस को प्रशिक्षण देने और सरकार की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे लाभों का उपयोग करने की अपील की। कार्यशाला के दौरान एनएपीएस पोर्टल के संचालन, अप्रेंटिस के चयन की प्रक्रिया, स्टाइपेंड प्रतिपूर्ति और योजना से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर तकनीकी चर्चा की गई। अधिकारियों ने औद्योगिक प्रतिनिधियों की शंकाओं का समाधान भी किया। कार्यक्रम में आईटीआई सितारगंज की प्रधानाचार्य इतिका त्यागी, सहायक निदेशक लोकेश चंद्र भट्ट, अभिषेक सिंह रावत और दिनेश चंद सहित आदि उपस्थित रहे।