पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के अपर गन्ना आयुक्त (क्रय) विश्वेश कनौजिया ने आज जनपद पीलीभीत का सघन दौरा कर गन्ना खेती की प्रगति और आधुनिक तकनीकों का जायजा लिया। इस भ्रमण के दौरान उन्होंने ग्राम उदयकरनपुर पहुंचकर प्रगतिशील किसान सुखविंदर सिंह के फार्म का विस्तृत निरीक्षण किया। अपर गन्ना आयुक्त ने खेत में अपनाई जा रही उन्नत कृषि पद्धतियों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की सराहना करते हुए किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सरकार के प्रयासों को साझा किया।
निरीक्षण के दौरान प्रगतिशील किसान सुखविंदर सिंह ने बताया कि वह लगभग 60 एकड़ क्षेत्रफल में गन्ने की खेती कर रहे हैं। उन्होंने अपनी तकनीक साझा करते हुए कहा कि वे अधिकांश बुवाई शरदकाल में 4 फीट की दूरी पर करते हैं। विशेष बात यह है कि उन्होंने गन्ने की दो पंक्तियों के बीच सहफसली के रूप में मटर की खेती अपनाई है, जिससे उन्हें प्रति एकड़ 50,000 से 60,000 रुपये तक की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। श्री सिंह ने गन्ने को किसानों के लिए सर्वाधिक लाभकारी फसल बताया, हालांकि उन्होंने वर्तमान में मजदूरों की भारी कमी को एक बड़ी चुनौती के रूप में पेश किया। उन्होंने बताया कि मशीनों से बुवाई तो आसान हो गई है, लेकिन कटाई के लिए मजदूरों पर निर्भरता के कारण प्रति कुंतल 50 से 60 रुपये का अतिरिक्त खर्च आता है, जिससे शुद्ध लाभ प्रभावित होता है।
किसानों की इन व्यावहारिक समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए अपर गन्ना आयुक्त विश्वेश कनौजिया ने बड़ा आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि गन्ना समितियों और चीनी मिलों के माध्यम से जल्द ही गन्ना कटाई हेतु आधुनिक हार्वेस्टिंग मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मशीनी कटाई का लाभ लेने के लिए किसानों को 4 फीट की दूरी पर ट्रेंच विधि से बुवाई अपनानी होगी। श्री कनौजिया ने यह भी घोषणा की कि मशीनों द्वारा कटाई की व्यवस्था को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए किसानवार और समितिवार एक विस्तृत कैलेंडर तैयार किया जाएगा, जिससे छोटे-बड़े सभी किसानों को समय पर सुविधा मिल सके।
इस महत्वपूर्ण भ्रमण के अवसर पर उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें उप गन्ना आयुक्त (बरेली) राजेश मिश्रा, उप चीनी आयुक्त (बरेली) राजेश कुमार और पीलीभीत व शाहजहांपुर के जिला गन्ना अधिकारी शामिल थे। इसके अलावा ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक (पूरनपुर) और मुख्य गन्ना अधिकारी (पूरनपुर) सहित विभाग के अन्य क्षेत्रीय अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने क्षेत्र में गन्ना विकास की संभावनाओं पर चर्चा की।
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