नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने करोड़ों नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत देते हुए भविष्य निधि (PF) से पैसा निकालने के नियमों को बेहद आसान और सख्त बना दिया है। नए नियमों के तहत जहाँ खाताधारकों को विशेष परिस्थितियों में अपना पूरा फंड निकालने की आजादी दी गई है, वहीं क्लेम सेटलमेंट में देरी करने वाले अधिकारियों पर भी सीधे तौर पर शिकंजा कसा गया है।
इन परिस्थितियों में निकाल सकेंगे 100% पीएफ (PF)
ईपीएफओ ने खाताधारकों की वित्तीय सुरक्षा और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित स्थितियों में पूरा पैसा निकालने की अनुमति दी है:
- वीआरएस (VRS) लेने पर: स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने वाले कर्मचारी अब अपना पूरा पीएफ फंड एक बार में निकाल सकते हैं।
- विकलांगता (Disability) होने पर: किसी भी प्रकार की शारीरिक विकलांगता या अपंगता की स्थिति में पूरा पीएफ निकालने की सुविधा मिलेगी।
- विदेश जाने पर: यदि कोई खाताधारक हमेशा के लिए विदेश शिफ्ट हो रहा है या वहां नौकरी के लिए जा रहा है, तो वह अपना पूरा फंड निकाल सकता है।
- 55 वर्ष की आयु: 55 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद खाताधारक अपने पूरे पीएफ क्लेम के लिए आवेदन कर सकता है।
बेरोजगारी और क्लेम सेटलमेंट के नए नियम
- 75% फंड निकालने का प्रावधान: यदि कोई व्यक्ति बेरोजगार हो जाता है, तो वह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने पीएफ फंड का 75 प्रतिशत हिस्सा एडवांस के रूप में निकाल सकता है।
- 3 दिन में क्लेम निपटाने का लक्ष्य: ईपीएफओ ने अब सभी प्रकार के पीएफ क्लेम को ऑनलाइन आवेदन के मात्र 3 दिनों के भीतर निपटाने (Settlement) का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है।
अधिकारियों की लापरवाही पर कड़ा एक्शन: लगेगा 12% ब्याज
ईपीएफओ ने खाताधारकों के क्लेम में होने वाली देरी को रोकने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है:
- 12% ब्याज का जुर्माना: यदि अधिकारियों की लापरवाही या देरी की वजह से पीएफ क्लेम समय पर पास नहीं होता है, तो ईपीएफओ खाताधारक को देरी की अवधि के लिए 12 प्रतिशत की दर से ब्याज देगा।
- कमिश्नर की सैलरी से होगी वसूली: सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि देरी के बदले दी जाने वाली इस ब्याज की राशि को किसी सरकारी फंड से नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्र के पीएफ कमिश्नर (PF Commissioner) की सैलरी से वसूला जाएगा। इस कदम से पीएफ दफ्तरों की कार्यप्रणाली में तेजी आने की उम्मीद है।