पीलीभीत। स्थानीय कृषि उत्पादन मंडी समिति में गेहूं की आवक में लगातार आ रही कमी ने प्रशासन और खाद्य विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अप्रैल का महीना अभी समाप्त भी नहीं हुआ है, लेकिन मंडी में गेहूं की आवक का ग्राफ तेजी से नीचे गिर रहा है। बुधवार को मंडी में मात्र 6,500 क्विंटल गेहूं की आवक दर्ज की गई, जबकि इससे एक दिन पहले मंगलवार को यह आंकड़ा 7,000 क्विंटल था। एक सप्ताह से जारी यह गिरावट सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर रही है, क्योंकि किसान सरकारी केंद्रों के बजाय निजी आढ़तियों या खुले बाजार को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इस वर्ष उत्पादन में आई भारी गिरावट को आवक कम होने का मुख्य कारण माना जा रहा है। पीलीभीत जनपद में फसल कटाई से ठीक पहले हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने गेहूं की पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। आंकड़ों के मुताबिक, जिस खेत में पहले प्रति एकड़ 5 से 6 क्विंटल तक उत्पादन होता था, वहां इस बार औसत उत्पादन घटकर महज 3.5 क्विंटल रह गया है। पैदावार कम होने के कारण किसानों के पास बाजार में बेचने के लिए पर्याप्त स्टॉक नहीं बच रहा है, जिसका सीधा असर मंडी की दैनिक आवक पर दिखाई दे रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर सरकारी खरीद को गति देने के लिए किसानों को कई रियायतें भी दी गई हैं, लेकिन वर्तमान में इन प्रयासों का कोई खास असर जमीन पर नजर नहीं आ रहा है। मंडी में नीलामी की प्रक्रिया निरंतर जारी है। बुधवार को मंडी समिति के कर्मचारी शशि वाला गौतम, जहीर अहमद, राजेंद्र सिंह, सुमन, प्रकाश चंद द्विवेदी और प्रमोद सिंह की देखरेख में गेहूं की ढेरी की नीलामी संपन्न हुई। इस नीलामी में गेहूं का भाव सरकारी समर्थन मूल्य से ऊपर बना रहा, जहां न्यूनतम बोली 2,455 रुपये प्रति क्विंटल रही, वहीं अधिकतम भाव 2,600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। बाजार में मिल रहे इन ऊंचे दामों के कारण भी किसान सरकारी कांटों से दूरी बना रहे हैं।
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