पीलीभीत। जनपद में विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में ‘राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0’ का भव्य और सफल आयोजन किया गया। जिला न्यायाधीश रवींद्र कुमार चतुर्थ के निर्देशन और सचिव सतीश कुमार की देखरेख में आयोजित इस अभियान ने वर्षों से न्यायालयों में चल रहे मुकदमों को आपसी सहमति से समाप्त कराकर मिसाल कायम की है।
3,141 पत्रावलियों पर हुई चर्चा, 212 मामलों में हुआ समझौता
अभियान को सफल बनाने के लिए जनपद के विभिन्न न्यायालयों से कुल 3,141 पत्रावलियां मध्यस्थता केंद्र भेजी गई थीं। लंबी वार्ता और सुलह-समझौते के बाद कुल 212 वादों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया।
इन अदालतों के मुकदमों का हुआ समाधान:
- पारिवारिक न्यायालय: 123 पत्रावलियां (सबसे अधिक)।
- मोटर दुर्घटना दावा (MACT): 65 पत्रावलियां।
- अन्य: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज और बीसलपुर न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालतों से जुड़े विभिन्न आपराधिक और दीवानी मामले।
लंबी कानूनी लड़ाई से मिली मुक्ति
मध्यस्थता केंद्र के माध्यम से न केवल पारिवारिक विवादों और मोटर दुर्घटना दावों को सुलझाया गया, बल्कि एन.आई. एक्ट और आपराधिक मामलों में भी पक्षकारों ने एक-दूसरे के गले लगकर विवाद खत्म किए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, मध्यस्थता प्रक्रिया से जहां अदालतों का बोझ कम होता है, वहीं पक्षकारों को समय और धन की बर्बादी से भी राहत मिलती है।
इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए प्राधिकरण ने कहा कि मध्यस्थता आपसी संबंधों को सुधारने और त्वरित न्याय दिलाने का सबसे सशक्त माध्यम है।
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