तेहरान (ईरान): पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कहे जाने वाले हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर कड़ा पहरा बैठा दिया है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरानी ठिकानों पर किए गए हमलों के जवाब में, तेहरान अब यहाँ से गुजरने वाले जहाजों को तीन विशेष श्रेणियों में बांटने की योजना बना रहा है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में हड़कंप मच गया है।

तीन श्रेणियों में बंटे देश: किसे मिलेगी एंट्री, किसे नहीं?

ईरान की नई रणनीति के तहत देशों को ‘शत्रु’, ‘तटस्थ’ और ‘मित्र’ देशों के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा:

  1. ‘शत्रु’ देश (Enemy Nations): इस श्रेणी में आने वाले देशों (मुख्यतः अमेरिका और इजरायल से जुड़े) के जहाजों पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।
  2. ‘तटस्थ’ देश (Neutral Nations): इन देशों के जहाजों को इस रास्ते का उपयोग करने के लिए भारी ‘ट्रांजिट शुल्क’ देना होगा और कड़े सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।
  3. ‘मित्र’ देश (Friendly Nations): भारत, रूस और चीन जैसे मित्र देशों के जहाजों को बिना किसी रोक-टोक और आसान प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

28 फरवरी के हमलों का प्रतिशोध

यह कड़ा फैसला 28 फरवरी को हुए उस घटनाक्रम का परिणाम है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। उन हमलों में हुए भारी जान-माल के नुकसान के जवाब में ईरान ने न केवल इजरायली क्षेत्रों और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, बल्कि अब वह दुनिया की तेल आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते (हॉर्मुज) को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।

वैश्विक तेल संकट की आहट?

दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ईरान के इस फैसले से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। यदि ‘शत्रु’ देशों के टैंकरों को रोका गया, तो इससे सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है।


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